Border-1997-vs-Sequel-Border-2- दोनों फिल्मों की तुलना और रिव्यू
1997 में आई फिल्म बॉर्डर भारतीय सिनेमा की सबसे प्रभावशाली देशभक्ति और युद्ध आधारित फिल्मों में गिनी जाती है। यह 1971 के भारत-पाक युद्ध की पृष्ठभूमि पर बनी थी और इसमें भारतीय सैनिकों के साहस, बलिदान, भावनाओं और परिवार से दूर रहकर देश की रक्षा करने की पीड़ा को बहुत संवेदनशीलता से दिखाया गया था। इस फिल्म में सनी देओल, सुनील शेट्टी, अक्षय खन्ना, जैकी श्रॉफ, राखी गुलज़ार, पूजा भट्ट और तब्बू जैसे कलाकार थे जिन्होंने अपने-अपने किरदारों को अमर बना दिया। सनी देओल का गुस्से और जज़्बे से भरा फौजी अवतार आज भी याद किया जाता है, वहीं अक्षय खन्ना का मासूम लेकिन साहसी जवान का किरदार दर्शकों को भावुक कर देता है। फिल्म के संवाद बेहद दमदार थे जैसे “पहली गोली वो चलाएगा और आख़िरी हम”, “ये धरती शेर भी पैदा करती है” और “मेरा वाहेगुरु मेरे साथ है” जैसे संवाद आज भी देशभक्ति की भावना जगा देते हैं। इसके गाने तो और भी ज्यादा अमर हो गए — खासकर “संदेशे आते हैं” जिसने हर सैनिक और उसके परिवार की भावना को आवाज़ दी और आज भी लोगों की आँखें नम कर देता है। इसके अलावा "हमें जब से मोहब्बत हो गई है....."
“हिंदुस्तान हिंदुस्तान”, “मेरे दुश्मन मेरे भाई” जैसे गीतों ने फिल्म को भावनात्मक और देशभक्ति दोनों स्तरों पर ऊँचाई दी।
वहीं नई फिल्म बॉर्डर 2 उसी भावना को आगे बढ़ाने का प्रयास है लेकिन नए समय, नई तकनीक और नई पीढ़ी के साथ। इसमें सनी देओल की वापसी पुराने दर्शकों को जोड़ती है जबकि वरुण धवन, दिलजीत दोसांझ और अहान शेट्टी जैसे नए कलाकार युवाओं को आकर्षित करते हैं। कहानी भी अब आधुनिक युद्ध परिस्थितियों और बदलते हालात के अनुसार आगे बढ़ती है। जहां पहली फिल्म में युद्ध की सादगी, ज़मीनी स्तर की लड़ाई और सैनिकों की भावनाएँ प्रमुख थीं, वहीं नई फिल्म में तकनीक, तेज़ एक्शन और आधुनिक प्रस्तुति ज्यादा दिखती है। बॉर्डर 2 के संवाद भी देशभक्ति से भरे हैं लेकिन वे अभी तक 1997 वाली फिल्म जैसे ऐतिहासिक और कालजयी नहीं बन पाए हैं। संगीत के मामले में नई फिल्म ने पुराने गीतों की भावना को नए रूप में प्रस्तुत किया है जैसे “घर कब आओगे” जो मूल “संदेशे आते हैं” की याद दिलाता है, लेकिन उसका प्रभाव भावनात्मक रूप से उतना गहरा नहीं बैठता जितना पुराने गीत का था।
इस तरह कहा जा सकता है कि बॉर्डर (1997) दिल से बनी एक भावनात्मक, सरल लेकिन बेहद शक्तिशाली फिल्म थी जिसने सैनिकों के त्याग को अमर बना दिया, जबकि बॉर्डर 2 उसी विरासत को आधुनिक अंदाज़ में आगे ले जाने की कोशिश है। पुरानी फिल्म यादों, भावनाओं और संवादों से जुड़ी है, नई फिल्म तकनीक, नई पीढ़ी और नए प्रस्तुतीकरण से। दोनों का उद्देश्य एक ही है — देशभक्ति जगाना — लेकिन एक दिल को छूती है और दूसरी आँखों को चकाचौंध करती है। यही दोनों के बीच सबसे बड़ा अंतर भी है और सबसे बड़ी कड़ी भी।
बाॅर्डर फिल्म भावनात्मक संबंध और विरासत:
बॉर्डर (1997) अपनी रिलीज़ के समय सिर्फ़ एक फिल्म नहीं थी — वह लोगों के अंदर सैनिकों के त्याग, घर से दूरपन, परिवार की याद और देश के लिए बलिदान की बहुत गहरी व्यक्तिगत भावना जगाती थी। गाना “Sandese Aate Hai” ने उस पीड़ा और आशा को शब्दों में पिरो दिया था, जो हर सैनिक और उसके घरवालों ने महसूस की — यही वजह है कि वह गीत दशकों बाद भी याद रखा जाता है और आज भी देशभक्ति और कट्टर श्रोताओं की भावनात्मक पहचान बन चुका है। Sandese Aate Hai को सुनते ही लोग रो पड़े और भावनात्मक प्रतिक्रिया दिखाई देते हैं, जैसे कि यह संगीत उनके अपने अनुभव का हिस्सा हो।
बॉर्डर 2 में इसी भावनात्मक धागे को फिर से जोड़ने की कोशिश “Ghar Kab Aaoge” जैसे गीतों से की जा रही है, जिसमें पुराने गीत की ताकत और यादों को नया रूप देने की कोशिश है। कुछ लोगों ने महसूस किया कि यह न सिर्फ़ पुराने गीत का रीक्रिएशन है, बल्कि भावनाओं को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक ले जाने जैसा प्रयास है, जिसे मिलाकर सुनने पर पुरानी यादें फिर से ताज़ा हो जाती हैं।
दर्शकों की प्रतिक्रियाएँ और तुलना:
पुराने हिस्से को देखकर: कई दर्शक मानते हैं कि 1997 वाली बॉर्डर में भावनाओं की सादगी, सैनिकों की ज़्यादा मानवीय प्रस्तुति और तपकर लिखे संवादों का असर बहुत गहरा था, जिसका असर आज भी लोगों के मन में है। यह फिल्म “देशभक्ति को मानवीय रूप देना” में सफल रही थी और इसी वजह से दर्शकों का उसका जुड़ाव दशक के बाद भी गहरा है।
नई फिल्म को लेकर प्रतिक्रियाएँ:
बॉर्डर 2 में गाने और भावनात्मक तत्वों को लेकर भी प्रतिक्रियाएँ मिश्रित हैं — कुछ लोग इसे सम्मानपूर्वक किया गया नाटक मानते हैं, लेकिन कई लोग यह महसूस करते हैं कि नया गीत और प्रस्तुति वो "कच्चा और मुखर भाव" नहीं दे पा रहे जैसा पुराना गीत देता था। यही वजह है कि कई लोगों को Ghar Kab Aaoge में वह गहराई नहीं मिल पा रही, जिसे Sandese Aate Hai में महसूस किया करते थे।
बोर्डर 2 फ़िल्म के गाने और कहानी तथा एक्सप्रेशन्स
फिल्म “बॉर्डर-2” भारतीय सिनेमा में देशभक्ति की भावना को फिर से जीवंत करने वाली एक बहुप्रतीक्षित फिल्म है। यह 1997 में आई सुपरहिट फिल्म बॉर्डर की विरासत को आगे बढ़ाती है, जिसमें भारत-पाक युद्ध के दौरान सैनिकों के साहस, बलिदान और मानवीय भावनाओं को बहुत प्रभावशाली ढंग से दिखाया गया था। बॉर्डर-2 भी उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए आधुनिक युद्ध परिस्थितियों, नई पीढ़ी के सैनिकों और बदलती सैन्य रणनीति को दर्शाती है। इस फिल्म में केवल लड़ाई नहीं, बल्कि सैनिकों का मानसिक संघर्ष, परिवार से दूरी का दर्द और राष्ट्र के लिए सब कुछ न्योछावर करने की भावना को केंद्र में रखा गया है।
बॉर्डर-2 आज के समय की चुनौतियों को ध्यान में रखकर बनाई गई है, जहाँ युद्ध सिर्फ बंदूकों से नहीं बल्कि तकनीक, रणनीति और सूचनाओं से भी लड़ा जाता है। फिल्म में यह दिखाया गया है कि कैसे आधुनिक भारतीय सेना ड्रोन, सैटेलाइट इंटेलिजेंस और साइबर सिस्टम के साथ दुश्मन का सामना करती है, फिर भी सैनिक का जज़्बा, उसका साहस और उसकी देशभक्ति वही रहती है जो पहले थी। यह फिल्म नई पीढ़ी को यह एहसास कराती है कि देश की सुरक्षा सिर्फ सीमाओं पर नहीं, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
फिल्म का भावनात्मक पक्ष भी उतना ही मजबूत है। इसमें सैनिकों के परिवारों की चिंता, माता-पिता की दुआएँ, पत्नी और बच्चों का इंतज़ार तथा अनिश्चित भविष्य की पीड़ा को बेहद संवेदनशील तरीके से दिखाया गया है। यही भावनात्मक गहराई फिल्म को सिर्फ एक वॉर-फिल्म नहीं, बल्कि एक मानवीय कहानी बनाती है। बॉर्डर-2 हमें यह याद दिलाती है कि जो हम चैन की नींद सोते हैं, उसके पीछे किसी न किसी सैनिक की जागती हुई रात होती है।
कुल मिलाकर बॉर्डर-2 देशभक्ति, बलिदान, तकनीक और मानवीय भावनाओं का संतुलित संगम है। यह फिल्म न सिर्फ मनोरंजन करती है, बल्कि दर्शकों के भीतर राष्ट्र के प्रति सम्मान, गर्व और जिम्मेदारी की भावना को और मजबूत करती है। यही कारण है कि बॉर्डर-2 केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि एक भावनात्मक अनुभव बनकर सामने आती ।
बॉर्डर 2 का जब पहला गाना “घर कब आओगे पर लोगों का रिएक्शन
बॉर्डर 2 का जब पहला गाना “घर कब आओगे”, जो 1997 के क्लासिक संदेशे आते हैं की याद दिलाता है, रिलीज़ हुआ तो लोगों में पुरानी यादें फिर से जाग उठीं। नए गाने की धुन और पैटर्न बहुत से लोगों को भावनात्मक लगता है, और कुछ लोगों ने इसे पुरानी यादों की तरह सहर्ष स्वीकार भी किया। हालांकि, कुछ दर्शकों का मानना है कि गाने का भाव वह गहराई नहीं दे पा रहा, जो पुराने गीत में थी, क्योंकि पुराना गाना सिर्फ़ संगीत नहीं बल्कि सैनिकों की पीड़ा, जज़्बा और देशभक्ति की भावना का हिस्सा बन चुका था। वहीं नया वर्ज़न थोड़ा आधुनिक बनाया गया है, जिसमें कई गायकों की आवाज़ भी शामिल है, जिससे कुछ लोगों को लगता है कि मूल ‘सोल’ कम हुआ ।
लेकिन सबसे ज़्यादा चर्चा और ट्रोलिंग वरुण धवन के एक्टिंग एक्सप्रेशन्स को लेकर हो रही है। गाने में उनके भाव और एक्सप्रेशन को कुछ दर्शकों ने “ओवरएक्टिंग” या “सिरियस सीन में भी गंभीर नहीं दिखना” कहा, और सोशल मीडिया पर यही कारण बन गया कि लोग उन्हें मज़ाक का विषय बना रहे हैं।
लोगों के शब्दों में यह ट्रोलिंग कुछ इस तरह दिखी है — “पहले वाले में भाव ज्यादा प्राकृतिक थे, अब सब दिखावा जैसा लगता है,” “वरुण के एक्सप्रेशन मज़ेदार लग रहे हैं,” या “ओरिजिनल जैसा गहरा जज़्बा नहीं दिख रहा।”
वरुण धवन ने खुद सोशल मीडिया पर सकारात्मक अंदाज़ में जवाब दिया और कहा कि ऐसे ही सवालों और प्रतिक्रियाओं ने गाने को और ज़्यादा वायरल बना दिया; उन्होंने कहा कि लोग गाने और टीज़र को प्यार दे रहे हैं और वह इसके लिए आभारी हैं।
कई फैंस ने भी उन्हें सपोर्ट किया और कहा कि एक्टिंग में कोई ख़ामी नहीं है और गाना अच्छा है, जबकि बॉर्डर 2 के प्रोड्यूसर ने कुछ कट्टर प्रतिक्रियाओं को “anti-national” जैसे तीव्र शब्दों से संबोधित कर दिया, जिससे बहस और बढ़ गई।
असल में यह ट्रोलिंग दो वजहों से ज़्यादा तेज़ हुई है —
लोग ओरिजिनल ऑफ़ बॉर्डर & संदेशे आते हैं से बहुत प्यार करते हैं और उसके स्तर की तुलना करना चाहते हैं,
सोशल मीडिया पर एक्सप्रेशन और अभिनय का मज़ाक बनाना आसान है, जिससे हर छोटी-सी चीज़ पर प्रतिक्रिया आती है।
बोर्डर 2 का तुलनात्मक रिव्यू Comparative review of Border 2
बोर्डर 1997 का अगर नई फिल्म या इसके नये वर्जन 2 की बात करें तो पहले की फिल्म पहली बार 1991 के युद्ध के साथ साथ किसी दो देशों के बीच युद्ध और होने वाली जनहानि को मार्मिक रुप से दर्शाती है साथ ही देश भक्ति बलिदान तथा मातृभूमि की रक्षा हेतु प्राण न्योछावर करने की बलिदानी भावना और जोश को दर्शाती है साथ ही वह सेक्युलरवाद को भी दर्शाती है जिसमें फौजी मुस्लिम लोगों की मदद करते हुए दिखाई देते हैं। सेना के नियमों अनुशासन तथा उन सैनिकों की पीड़ाओं को दर्शाया गया है जिसमें हर सैनिक जिन्दा रहकर परिवार के सपनों को पूरा कर सकें। इसके साथ साथ पुरानी फिल्मों में सादगी तथा नैसर्गिक दृश्यों को शूट किया गया है जो ग्रामीण क्षैत्र के जीवन और वहां की सांस्कृतिक और भौगोलिक स्थिति का निरूपण करती है। वहीं एक्टर जो सैनिकों के रोल में हैं उनकी प्रेम कहानियां और वैवाहिक जीवन ग्रामीण क्षेत्रों और वहां के रहन-सहन अनुसार साधारण और सादगी के साथ दर्शाया गया है। धर्मवीर (अक्षय खन्ना) तथा उनकी मंगेतर कम्मो (पूजा भट्ट) की सादगी और सुन्दरता वास्तव में बहुत सादगी के साथ दिखाई गई है। "हमे जब से मोहब्बत हो गई है " गाने में पूजा भट्ट का लुक व सौन्दर्य बहुत आकर्षित है जो आजकल आर्टिफिशियल तथा आधुनिक मेकअप की तुलना में बहुत सुंदर लगता है। फिल्माएं गये इस गीत में साइकिल और पगडंडियों का मनोरम दृश्य ग्रामीण और हरे-भरे खेत खलिहानों का है जो प्राकृतिक छटा का मनमोहक दृश्य भाव प्रस्तुत करता है। वहीं फिल्म में सुनील शेट्टी के किरदार का नाम कैप्टन भैरव सिंह राठौड़ था और उनकी पत्नी का किरदार अभिनेत्री शरबानी मुखर्जी ने निभाया था जो सीन उनकी सुहागरात के समय अश्लिलता के परे साधारण और देशभक्ति की सर्वोपरि भावना के साथ था जिसमे उन्हें ड्युटी पर वापिस बुलाने का तात्कालिक आदेश था जिसकी वे पालना करते हैं। वहीं फिल्म में क्षेत्रवाद का भी दृश्य है जिसमें दो सैनिक अपनी क्षेत्रीय भिन्नता को लेकर लड़ते हैं कि हमारी भूमि जैसी भी हो हमारी मातृभूमि है इसके बारे में कोई आलोचना नहीं सुनना चाहते हैं। वहीं इस फिल्म में देशभक्ति युद्ध कौशल और जूनून की एक बहुत रोमांचक भावना है वहीं प्यार और मोहब्बत को भी स्थान दिया गया है जो खासकर कनु और धर्मवीर के बीच प्यार और मोहब्बत के अच्छे सीन दिखाए गए हैं। वहीं इस फिल्म में मां और बेटे के बीच दर्द फिक्र और उस ममता के भाव को बड़े अच्छे किरदार के रूप में फिल्माया गया है। कुल मिलाकर इस फिल्म में एक सांस्कृतिक विरासत और युद्धकालीन परिस्थितियों के साथ साथ देशभक्ति जोश जूनून और प्रेम सभी को मार्मिक और भावनात्मक रूप से बेहतरीन तरीके से पेश किया है। मतलब पुरानी बोर्डर एक फिल्म ही नहीं एक भावनात्मक पूंज था जो आज तक लोगों को देशभक्ति युद्ध से हानि और सैनिकों के जीवन और उनकी शहादत तथा देश के लिए उनकी सर्वोपरि कर्तव्यनिष्ठा का एक अमिट और दिल में घर बनाने वाली एक सांस्कृतिक और भावनात्मक कहानी दी जो हमेशा के लिए एक दीवानगी थी जो केरेक्टर्स में सैनिकों का असली रूप महसूस करवाती है जो दिल दिमाग़ और रूह तक वास्तविकता का अनुभव करवाती है।
दूसरी तरफ बाॅर्डर 2 की बात करें तो सीधे शब्दों में जो कहानी या किसी घटना का निरूपण एक बार सुनाया जाता है तो दुबारा उसे कितना भी अपडेट करके किसी को सुनाया जाए लेकिन वो थ्रिल और कहानी तथा घटनाक्रम और परिणाम का आकृषण पहली मौलिक बात से कभी बेहतरीन और आकर्षित नहीं हो सकती है। जैसे बाॅर्डर फिल्म की जो पहली भारत पाक युद्ध की झलकियां और चलचित्र दिखाएं गये वे दर्शकों में मौलिकता की गहरी छाप छोड़ गये है इसलिए उसी घटनाक्रम को दुबारा दिखाना दर्शकों के लिए बोरिंग हो जाता है हालांकि देखने वाले लोग देखेंगे हर कोई फिल्म हिट होना विभिन्न कारणों पर निर्भर करती है।
बाॅर्डर 2 फ़िल्म की बात करें तो इसमें सनी देओल का अभिनय और आवाज इस फिल्म में पहले वाली बार्डर की यादें ताजा जरूर करेगी लेकिन जहां पहले वाली बार्डर में सादगी तथा सैनिकों के रियल अनुभव की जगह इस बाॅर्डर-2 में आर्टिफिशियल सीन, क्लियरटी आधुनिक हथियार, वायुसेना के साथ साथ जल सेना के सीन तथा राष्ट्रवादी सोच के डायलाग तथा पाकिस्तान को तबाह करने की कहानी बिल्कुल आधुनिक सिनेमा और उसकी चकाचौंध एडिटिंग के साथ आई है। इस मूवी में हाल ही में भारत पाकिस्तान के तनाव और एयर स्ट्राइक तथा मिसाइलों के हमलों आदि को नये एडिशन में पेश किया गया है जो अक्सर एआई जनरेशन के दौर में आकृषित साफ-सुधरे हाई क्वालिटी के सीन दिखाए गए हैं। भारत में इन दिनों हिन्दु कट्टरवाद और राष्ट्रवाद विशेष कर पाकिस्तान से जो दुश्मनी का संचार जनमानस में किया गया है उससे दर्शकों को पाकिस्तान पर उस हर हर पहलू को पसन्द किया जा रहा है जिसमें भारत हर क्षेत्र में पाकिस्तान पर हावी रहें इसलिए लोगों की उन भावनाओं की परिपूर्णता के लिए बिल्कुल फ़िल्म में वो ही किया गया है फ़िल्म निर्माताओं ने जनता के दिल की भावना के अनुसार वो सीन शूट किए हैं जिसमें पाकिस्तान को ललकारने की आवाजें,भारत माता की जय ,आदि वे रोमांचक चीजें जो पाकिस्तान को परास्त करते हुए दिखती हो। इसलिए इस फिल्म में सादगी और भावनात्मक रूप की जगह वो थ्रिल देखने को मिलेगा जिससे फिल्म ज्यादा हिट हो और कमाई कर सकें वैसे आजकल फिल्मों का लक्ष्य कमाई ही ज्यादा मायने रखता है। इसलिए यह फिल्म चलेगी यह तो तय है लेकिन बात करें उन पुराने गाने सन्देशे आते हैं तो यह नया गाना घर कब आओगे उस पुराने गाने को टक्कर नही दे सकता। क्योंकि उस गाने की ओरिजनल धून को लोगों के दिलों से नहीं बदला जा सकता है। खैर भारत पाकिस्तान के बीच युद्ध की फिल्म हो तो वो हिट तो होगी साथ ही टाइटल बाॅर्डर है तो लोगों को देखने की कौतुहलता तो रहेगी। बेसब्री से लोगों को फिल्म की कहानी और थ्रिलर्स का इंतजार रहेगा। हालांकि गाने पर वरुण धवन की एक्टिंग को लोगों ने ट्रोल किया है कि अक्षय खन्ना की तरह ये नये एक्टर्स सैनिकों की असली फिलिंग देने में उतने कामयाब नही हुए। दूसरी तरफ फिल्म की कहानी पाकिस्तान को तबाह करने का रोमांच पैदा करती है जो भारतीय लोगों के लिए देशभक्ति की भावना और पाकिस्तान से नफरती अंदाज को फूलफिल करने पर जोर दिया गया है।
इस प्रकार बॉर्डर 2 एक देशभक्ति पर आधारित फिल्म है जो भारतीय सेना के साहस और बलिदान को दिखाने का प्रयास करती है। फिल्म में युद्ध के दृश्य तकनीकी रूप से प्रभावशाली हैं और सिनेमैटोग्राफी तथा बैकग्राउंड म्यूज़िक माहौल को गंभीर और भावनात्मक बनाते हैं। कुछ गीत फिल्म की आत्मा को मजबूत करते हैं और दर्शकों को पुराने बॉर्डर की याद दिलाते हैं। फिल्म का उद्देश्य सम्मानजनक है और उसका संदेश स्पष्ट है कि देश की रक्षा करने वाले सैनिकों का त्याग अमूल्य है।
हालाँकि फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी उसकी कहानी है, जो पहली बॉर्डर की छाया से बाहर नहीं निकल पाती। नया पन और मौलिकता की कमी साफ महसूस होती है। अभिनय, विशेषकर मुख्य किरदार का, कई जगह जरूरत से ज़्यादा बनावटी लगता है और सैनिक जैसी गंभीरता पूरी तरह नहीं ला पाता, इसी कारण उसे सोशल मीडिया पर आलोचना भी झेलनी पड़ रही है। संवाद भी उतने असरदार नहीं हैं जितने पहली फिल्म में थे और कई दृश्य भावनात्मक होने के बजाय जबरन भावुक बनाए गए लगते हैं।
कुल मिलाकर बॉर्डर 2 एक अच्छी नीयत वाली लेकिन औसत स्तर की देशभक्ति फिल्म है, जो भावनाओं को छूने की कोशिश तो करती है, पर गहराई और नवीनता की कमी के कारण पहली बॉर्डर जैसी अमिट छाप नहीं छोड़ पाती।

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