बादाम,काजू,किशमिश, पिस्ता,खुबानी,अखरोट,अंजीर दाख सभी प्रकार के ड्राई फ्रूट्स नाम फोटो फायदे नुकसान तासीर तथा खाने का तरीका Jagriti PathJagriti Path

JUST NOW

Jagritipath जागृतिपथ News,Education,Business,Cricket,Politics,Health,Sports,Science,Tech,WildLife,Art,living,India,World,NewsAnalysis

Translate This Article

Tuesday, August 31, 2021

बादाम,काजू,किशमिश, पिस्ता,खुबानी,अखरोट,अंजीर दाख सभी प्रकार के ड्राई फ्रूट्स नाम फोटो फायदे नुकसान तासीर तथा खाने का तरीका

Dry fruits and nuts
All dry fruits and nuts Name, Pictures,Nature, benifit,Disadvantages of eating, way of eating


सूखे मेवे Dry Fruits and nuts

बादाम ,काजू,किशमिश,मुनक्का,पिस्ता,खुबानी,अखरोट
,अंजीर दाख,चिरोंजी, सुपारी,अलसी, अजवाइन, खरबूजे के बीज, मुंगफली,तिल,चिलगोजा,आलुबुखारा, खजुर,
,Badam,kajoo,kishmish,dakh munakka,pista,khubani,Anjeer,chhuhara Mungfali,Chironji,makhana, Nariyal,Supari
Almonds,Cashew,Raisins,Pistachios , Apricots,Walnuts,Figs,Vines,Dates,Peanuts
Cudpahnut, coconut,Betel-Nut,Cantaloupe Seeds,शाहबलूत, Chestnut,Pine Nut,Pumpkin Seeds
ड्राई फ्रूट्स खाने के फायदे क्या हैं?
ड्राई फ्रूट्स कब खाने चाहिए?
ड्राई फ्रुट्स कैसे खाने चाहिए?
ड्राई फ्रूट्स कौन-कौन से हैं?
ड्राई फ्रूट्स के नाम और चित्र?
ड्राई फ्रूट्स के नुक़सान क्या है?
सुबह कौनसे ड्राई फ्रूट्स खाने चाहिए?
खाली पेट ड्राई फ्रूट्स खाने के फायदे क्या हैं?
कैंसर में कौन-से ड्राई फ्रूट्स खाने चाहिए?
 

•What are the benefits of eating dry fruits  
•When should dry fruits be eaten?
•How to eat dry fruits?
•What are dry fruits?
•Names and pictures of dry fruits?
•What are the disadvantages of dry fruits?
•Which dry fruits should be eaten in the morning?
•What are the benefits of eating dry fruits on an empty stomach?
 •Which dry fruits should be eaten in cancer?

बादाम Almond 

Dry Almond
Badam बादाम


परिचय 
बादाम मेवों में ताकतवर और सबसे उपयोगी माना जाता है। इसे अंग्रेज़ी ऑल्मड Almond कहा जाता है।

बादाम की तासीर Taseer


बादाम फल या बादाम के दाने रूपी सुखे मेवे की तासीर गर्म होती है। इसलिए गर्मियों में इसका सेवन कम तथा पानी में भिगो कर करना चाहिए।


बादाम का वैज्ञानिक नाम: 


बादाम का वैज्ञानिक नाम तथा वानस्पतिक नाम प्रूनुस डल्शिस, प्रूनुस अमाइग्डैलस(Prunus dulcis, Prunus amygdalus) है। यह रोज़ेशी कुल तथा प्रुनुस वंश का पौधा होता है। इसका उपवंश अमाइग्डैलस है।
बादाम दो प्रकार के होते हैं जिसमें मीठे और कड़वे शामिल हैं।


बादाम गिरी Badam Giri 

बादाम गिरी बादाम के अंदर से निकलने वाला फल है, जो आमतौर पर इसके मोटी परत या चिलके को निकाल कर या हटाकर प्राप्त किया जाता है। बादाम के अन्दर के बीजीय भाग को बादाम गिरी कहा जाता है। बादाम बहुपयोगी बीज है जिसका तेल भी बेशकीमती होता है।


बादाम खाने के फायदे Benifits of Almond


बादाम प्रकृति की स्वादिष्ट और बहुपयोगी देन है इसके सभी भाग जिसमें बीज ,तेल ,गिरी आदि बेशकीमती और मानव शरीर के लिए स्वास्थ्यप्रद होते हैं। बादाम का सेवन सर्दियों में दुध के साथ किया जाता है जिसमें व्यक्ति का शरीर ऊर्जावान और स्फूर्तिवान बनता है। त्वचा बाल तथा सभी अंगों को बादाम से बहुत फायदा मिलता है। यौवन शक्ति में भी दूध और बादाम का नियमित सेवन फायदेमंद माना जाता है।

स्मृति या यादाश्त तेज रखने उपयोगी बादाम


बादाम का सेवन मस्तिष्क की क्रियशीलता तथा ध्यानाकर्षण की शक्ति तेज होती है। इसलिए अपनी मैमोरी को तंदुरुस्त रखने के लिए बादाम का सेवन उपयोगी माना जाता है।

वजन नियंत्रित करने में मददगार


बादाम में काफी ऊर्जा होती है जिससे जल्दी भूख नहीं लगती। असल में बादाम हमें ओवर इटिंग से बचाता है। अगर आप बादाम खाते हैं तो आपको पेट के भरे रहने का अहसास होगा। बादाम में मौजूद फाइबर, प्रोटीन और हेल्दी फैट हमें भूख से बचाते हैं तथा स्फूर्तिवान रखते हैं।


डायबिटीज या शुगर को कंट्रोल करने में मददगार Control Diabetes 


बादाम में मैग्नीशियम होता है जो काफी फायदेमंद है। यह डायबिटीज मरीजों में ब्लड शुगर लेवल (Blood Sugsar Level) को कंट्रोल करता है। 

 रक्त और हड्डियों के लिए उपयोगी बादाम

 
बादाम में विटामिन ई और मैग्नीशियम होते हैं, जो हड्डियों को मजबूत करने, और शरीर में सुचारू ठंग से खून के फ्लो में मदद कर सकते हैं। इसके साथ ही यह मांसपेशियों को भी मजबूत बनाता है। इसके साथ बादाम का नियमित सेवन शरीर के लिए बहुत फायदेमंद है। इसके फायदे अनेक है जो शरीर की विभिन्न क्रियाओं और अंगो की कार्यप्रणाली को हेल्दी रखता है। जिसमें मेमोरी , त्वचा,बाल, हड्डियां आदि अंगों के लिए बहुपयोगी मेवा है।मुट्ठीभर बादाम में लगभग 170 ग्राम फाइबर होता है, शरीर को रोज़ाना सिर्फ 25 से 40 ग्राम फाइबर की जरुरत होती है तो अगर आप रोज़ 3 से 4 बादाम खाते हैं तो यह आपके शरीर में फाइबर की जरूरत को पूरा करता है। 


बादाम खाने के नुकसान


किसी भी चीज की अति नुकसानदायक होती है इसलिए बादाम सेहतमंद होने के साथ साथ नुकसानदायक भी हो सकती है अगर इसका सेवन अनियमित ढंग से किया जाता है। 
अगर पाचन से जुड़ी समास्‍याएं रहती हैं तो आपको बादाम खाने में सावधानी बरतने की जरूरत होती है अगर आप ज्‍यादा बादाम खा लेते है तो यह पेट से जुड़ी समस्‍याएं जैसे लूज़ मोशन्स और कब्ज की शिकायत पैदा कर सकता है। बादाम की तासीर गर्म होती है इसलिए अधिक सेवन आंतों में गर्मी का कारण बन सकता है। इसके साथ ही यह पेट में ब्लोटिंग जैसी समस्‍या की वजह भी बन सकता है।

काजू Cashew

Cashew
Kajoo काजू


परिचय

काजू सभी ड्राई फ्रूट्स का राजा माना जाता है मानव सेहत के लिए काजू कई तरह से फायदेमंद होता है। काजू में मौजूद प्रोटीन हड्डियों को मजबूत बनाता है। तथा मोनो सैचुरेटड फैट दिल को स्वस्थ रखता है और दिल की बीमारियों के खतरे को कम करता है। इस प्रकार काजू के अनेक फायदे हैं। दूसरी तरफ अत्यधिक सेवन नुकसान भी कर सकता है।काजू के पेड़ और उत्पादन की बात करें तो काजू का पेड़ तेजी से बढ़ने वाला उष्णकटिबंधीय वृक्ष होता है । आमतौर पर यह वृक्ष लगभग 13 से लेकर 14 मीटर meter तक लम्बाई प्राप्त करता है। यह पेड़ काजू के बीज और काजू सेब का उत्पादन करता है। केश्यू एप्पल पर लगे गुर्दे के आकार जैसे नट्स को विभिन्न प्रक्रियाओं से सुखा कर अलग किया जाता है।
काजू का सेवन विभिन्न तरीकों से उपयोगी माना जाता है। काजू सुखे मेवों में सर्वोपरि है काजू के बिना किसी स्वादिष्ट हलवे मिठाई या अन्य किसी व्यंजन की कल्पना नहीं की जा सकती। हालांकि काजू का उत्पादन अन्य देशों में भी होता है लेकिन भारत दुनिया में 23 प्रतिशत से अधिक काजू का उत्पादन कर अव्व्ल है।


काजू का वैज्ञानिक नाम

 
काजु को अंग्रेजी में कैश्यु Cashew कहा जाता है काजू का वानस्पतिक नाम या वैज्ञानिक नाम एनाकार्डियम अरोमैटिक anacardium aromatic है। काजू (Kaju)
 Anacardiaceae (ऐनाकार्डिएसी) कुल का पेड़ होता है।

काजू की तासीर

काजू की तासीर गर्म होती है। ये गर्मी में अधिक खाने पर आंतों में गर्मी का कारण बन सकता है । काजू की प्रकृति गर्म होती है।

काजू खाने का तरीका


काजू मेवे के साथ साथ स्वादिष्ट और पौष्टिक होता ही है यह विभिन्न प्रकार के व्यंजनों में डाला जाता है। काजुओं को पानी में भिगो कर भी सेवन किया जा सकता है।
काजू का इस्तेमाल मिठाई और सब्जी की ग्रेवी को स्वादिष्ट बनाने के लिए खूब किया जाता है‌। काजू की स्वादिष्ट मिठाई काजू कतली भी बनाई जाती है । पनीर और खीर में भी काजू का इस्तेमाल बहुत ही स्वादिष्ट और पौष्टिक माना जाता है। काजू से बनी बर्फी को ज्यादातर लोग बहुत पसंद करते हैं। स्वाद के साथ ही यह सूखा मेवा सेहत को स्वस्थ रखने में भी खूब उपयोगी है। भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में इसका उपयोग विभिन्न तरीकों से किया जाता है।


काजू खाने के फायदे Kaju ke Fayde in Hindi


काजू मेवा विभिन्न तरीकों से फायदेमंद होता है इसका सेवन विभिन्न तरीकों से किया जाता है। काजू हमारी सेहत के लिए विभिन्न तरीकों से उपयोगी है। आइए जानते हैं काजू के फायदे।


मसूड़ो और दातों के लिए काजू खाने के लाभ


काजू में प्रोटीन,मैग्नीशियम और कैल्शियम की अच्छी मात्रा होती है जो दांतों और मसूड़ों के लिए बहुत अच्छा माना जाता है।

दिल को स्वस्थ्य रखता है काजू

मानव शरीर का सबसे उपयोगी और महत्वपूर्ण अंग दिल Heart है दिल को हेल्दी रखना बहुत जरूरी होता है इसलिए काजु का नियमित सेवन ह्रदय को मजबूती प्रदान करता है।


पाचन तंत्र पर काजू खाने के लाभ


काजू का नियमित सेवन पाचन शक्ति के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है। काजू में मौजूद विभिन्न पौष्टिक तत्व पाचन शक्ति को मजबूत बनाने में मदद करते हैं।


हड्डियों को मजबूत करने में काजू के लाभ


काजू में मौजूद कैल्शियम हड्डियों को मजबूत बनाता है तथा कैल्सियम की कभी से कमजोर हुई हडि्डयों को मजबूत बनाता है।


बालों के लिए काजू के फायदे


काजू का नियमित और संतुलित सेवन बालों को आधार प्रदान करता है। इससे बालों का कालापन बना रहता है वहीं बाल झड़ने बन्द होते हैं। काजू बालों के लिए पौष्टिक माना जाता है।


काजू में होते हैं एंटीऑक्सीडेंट 


काजू में एंटीऑक्सीडेंट तत्व पाये जातें हैं जो हमारे शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाने तथा विभिन्न रोगों और संक्रमण के ख़तरे को कम करता है। कैंसर के ख़तरे को कम करने में काजू का नियमित सेवन फायदेमंद होता है।

काजू खाने के नुकसान:


वैसे काजू में अनेक लाभकारी गुण है लेकिन आवश्यकता से अधिक अनियमित सेवन से यह स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या पैदा कर सकता है।कच्चा काजू खाने से भी बचना चाहिए। कच्चे काजू में यूरोशॉइल बैक्टीरिया होते हैं जिससे स्किन एजर्ली होने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए काजू को गर्म पानी में धोकर या थोड़ा-सा सेककर खाना चाहिए।
 काजू बहुत जल्दी वजन बढ़ाता है। काजू में कैलोरिज़ और अनसैचुरेटिड फैट्स अधिक होता है। वजन कम करने वालो को इसे कम मात्रा में सेवन करना चाहिए।
 काजू खाने से सांस लेने में कठिनाई, पित्ती, चकत्ते, खुजली, उल्‍टी या फिर दस्‍त की शिकायत हो सकती है इसलिए ऐसे लोगों को काजू का इस्तेमाल करते समय सावधानी बरतनी चाहिए। जिन भी लोगों को सिर दर्द या माइग्रेन की शिकायत हो तो काजू खाने से बचना चाहिए।


मुनक्का, काली दाख /किशमिश Raisins

Dry Raisins
Kishmish, Munakka,dakh मुनक्का


परिचय

अंगूर देखकर हर किसी के मुंह में पानी आ जाता है तो अंगुर जब ताजे हों और रसीले हो तो सेहत के लिए किसी वरदान से कम नहीं होते लेकिन बात करते हैं अंगूरों को सुखाकर बनाएं गये स्वादिष्ट और पौष्टिक मेवों के बारे में जिसे हम मुनक्का या किशमिश कहते हैं अंगूरों की अनेक किस्म है जिसके अनेक फायदे हैं।
मुनक्का और किशमिश दोनों अंगूर को सुखाकर बनाएं जातें हैं । साधारण किशमिश छोटे अंगूरों को सुखाकर तैयार की जाती है तो मुनक्का लाल रंग के बड़े अंगूरों से बनाया जाता है। इनमें बीज भी होता है यह काले भी होते हैं। इन अंगुरो की अलग अलग किस्म होती है जिनमें सुखाई जाने वाली किस्में पूसा सीडलैस, किशमिश बेली, ब्लैक कीरिन्थ, मस्कट ऑफ एल्बेजेन्डर आदि है।
जब हमें बहुत कमजोरी और थकान महसूस होती है, तब रोज मुनक्के का सेवन करना चाहिए। ये शरीर को मजबूती देता है और कमजोरी दूर भगाता है।


किशमिश या मुनक्का का वैज्ञानिक नाम


किशमिश या मुनक्का अंगूर से ही बनते हैं इसलिए इसका वैज्ञानिक नाम सॉलटेना (Sultana) विटिस विनीफेरा Vitis vinifera है।


किशमिश या मुनक्का की तसीर 


मुनक्का या किशमिश जो अंगुरो को सुखा कर बनाया जाता है इसलिए मुनक्का की तासीर गर्म होती है। अधिक सेवन करने से शरीर में गर्मी पैदा करते हैं । इसलिए गर्मियों में बेहतर परिणाम के लिए रातभर पानी में भिगोकर सुबह खाने की सलाह दी जाती है।


किशमिश या मुनक्का खाने का तरीका


छोटे आकार के अंगूर को सुखाकर किशमिश बनाई जाती है जबकि मुनक्के को बड़े और पके अंगूर को सुखाकर बनाया जाता है। किशमिश में बहुत कम मात्रा में छोटे बीज होते है जबकि मुनक्का में बड़े बीज होते हैं।
दुनिया भर में किशमिश या काले मुनक्के का सेवन विभिन्न प्रकार से किया जाता है इसे अन्य व्यंजनों में डाल कर भी खाया जा सकता है तथा दूध के साथ लेना बेहतर होता है। रात में सोने से एक घंटे पहले 8 से 10 मुनक्कों को दूध में उबालें और मुनक्कों को खाकर दूध पी लें इससे काफी फायदा मिलेगा। इसके अलावा इसे पानी में भिगोकर भी खाया जा सकता है।

किशमिश मुनक्का या काली दाख के फायदे


किशमिश और मुनक्का दोनों फायदेमंद है लेकिन काले मुनक्के को किशमिश की तुलना में ज्यादा फायदेमंद माना गया है । मुनक्के को कई रोगों को जड़ से खत्म करने वाला बताया गया है क्योंकि मुनक्के में पाए जाने वाले पोषक तत्व शरीर के हर हिस्से में फायदा पहुंचाते हैं। मुनक्का खून बनाने तथा बल्ड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है। आइए जानते हैं मुनक्के के औषधीय गुणों के बारे में विस्तृत रूप में। मुनक्के में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-ऑक्‍सीडेंट गुण मौजूद होता है। साथ ही इसमें एंटी बैक्‍टीरियल गुण होते हैं जो बुखार को कम करने में उपयोगी माना जाता है।

दिल की सेहत के लिए अच्छा है मुनक्का और दाख


मुनक्का दिल की सेहत के लिए काफी अच्छा माना गया है। मुनक्के में पोटैशियम काफी मात्रा में पाया जाता है, जो कि हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में मददगार है। 

हड्डियां मजबूत करता है मुनक्का


भागदौड़ भरी जिंदगी और बढ़ती उम्र के साथ हड्डियां भी कमजोर होने लगती हैं और ऐसा कैल्शियम की कमी के कारण होता है। मुनक्के में कैल्शियम भरपूर होता है, साथ ही इसमें बोरान नामक तत्व भी पाया जाता है जो हड्डियों तक कैल्शियम को पंहुचाने का काम करता है। 

मुनक्का कब्ज से देता राहत


कब्ज की समस्या से छुटकारा दिलाने में भी मुनक्का कारगर है क्योंकि मुनक्का फाइबर का अच्छा स्रोत माना जाता है। इसे नियमित लेने से पेट की अन्य समस्याएं भी दूर होती हैं।

रक्त बढ़ाकर एनीमिया को दूर करता है मुनक्का


मुनक्के में विटामिन बी कॉम्प्लेक्स और कॉपर पाए जाते हैं। दोनों ही तत्व खून को बढ़ाने में मददगार है। मुनक्का का सेवन एनीमिया के मरीजों के लिए काफी लाभकारी है। काली दाख खून बनाने में रामबाण मानी जाती है।


खुबानी Apricot

Dry Apricot
खुबानी Khubani


परिचय 

खुबानी फल पीले-नारंगी रंग के होते हैं। इनकी बाहरी त्वचा पर छोटे बाल तथा यह नरम बनावट के होते हैं। खुबानी फल को छीलने के बिना खाया जा सकता है। यह दुनिया के सबसे स्वास्थ्यप्रद फलों में से एक है। खुबानी कई पोषक तत्वों से भरपूर होता है। खुबानी उत्पादन में तुर्की और ईरान अव्वल है। ख़ुबानी एक ठन्डे प्रदेश का पौधा है। इसके फल दिखने में जितने खुबसूरत है उतने ही लाभकारी होते हैं इसके सुखे मेवे पौष्टिक और औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं।इसमें विटामिन ए, बी ,सी और विटामिन ई पाए जाते हैं। विटामिन के साथ-साथ इसमें पोटेशियम, मैग्नीशियम, कॉपर, फॉस्फोरस आदि भी होता है। खुबानी फाइबर का भी अच्छा स्त्रोत होता है।

खुबानी का वैज्ञानिक नाम


खुबानी का वैज्ञानिक नाम प्रूनस आर्मेनियाका (Prunus armeniaca) है।

खुबानी की तासीर


खुबानी की तासीर गर्म (hot) होती है इसलिए गर्मियों में इसका सेवन सावधानी से करना चाहिए।

खुबानी के सेवन करने का तरीका


खुबानी फल के सुखे मेवे को खाया जाता है जो बहुत स्वादिष्ट होता है वही इसका सेवन विश्व में विभिन्न तरीकों से किया जाता है। ख़ुबानी की गुठली के अन्दर का बीज एक छोटे बादाम की तरह होता है और ख़ुबानी की बहुत सारी क़िस्मों में इसका स्वाद एक मीठे बादाम सा होता है। इसे खाया जा सकता है, लेकिन इसमें हलकी मात्रा में एक हैड्रोसायनिक ऐसिड नाम का ज़हरीला पदार्थ होता है। इसलिए इसके बीज को बच्चों को नहीं खिलाना चाहिए

खुबानी सेवन के फायदे


खुबानी फल या मेवे के अनेक चमत्कारी फायदे हैं इसमें विटामिन ए के अलावा विटामिन सी और पोटेशियम, मैग्नीशियम, कॉपर, फॉस्फोरस और फाइबर पाया जाता है जो पाचन (Digestion) शक्ति और अन्य स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं में गुणकारी होता है यह फल ब्लड प्रेशर (Blood Pressure) और कोलेस्ट्रॉल लेवल को कंट्रोल करके दिल के स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है। 

खुबानी आंखों की रोशनी के लिए उपयोगी

 
इस फल में विटामिन ए पाया जाता है जो कि आंखों की रोशनी के लिए फायदेमंद होता है

एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर खुबानी


खुबानी बीटा कैरोटीन और विटामिन ए, सी, और ई सहित कई एंटीऑक्सिडेंट का एक अच्छा स्रोत है। ये फ्लेवोनोइड्स नामक पॉलीफेनोल एंटीऑक्सिडेंट के एक समूह में उच्च हैं, जिन्हें मधुमेह और हृदय रोग सहित बीमारियों से बचाने के लिए फायदेमंद माना जाता है। 
 

पाचन शक्ति बढाए खुबानी 


खुबानी में फाइबर की मात्रा खूब होती है जिस वजह से ये हमारे पाचन को बेहतर करने में मदद करता है। फाइबर के कारण यह कब्ज की समस्या को दूर करता है।



अखरोट Walnut

Dry Walnut
अखरोट Akhrot


परिचय
एक पर्वतीय वृक्ष तथा उसका फल जिसकी गिनती मेवों में होती है। इसका ऊपरी आवरण बहुत कठोर होता है । तथा अन्दर की खाने योग्य गिरी नर्म मुलायम और तेलीय प्रकृति की होती है। अखरोट का मूल स्‍थान भारत और कैस्पियन सागर के आसपास के हिस्सों को माना जाता है। अखरोट अब चीन, ईरान तुर्की, मैक्‍सिको, यूक्रेन, चिली और संयुक्त राज्य अमेरिका के कैलिफोर्निया और एरिज़ोना में भी उगाए जाते हैं।

अखरोट का वैज्ञानिक या वानस्पतिक नाम


हिंदी में अखरोट तथा इंग्लिश में Walnut के नाम से जाना जाता है इस फल का वैज्ञानिक नाम जुगलेन्स रीजिया Juglans Regia है।अन्य नामों में अक्षरोट,चौमगज़ा भी कहते हैं।

अखरोट खाने का तरीका


अखरोट की गिरी का सबसे ज्‍यादा इस्‍तेमाल किया जाता है। हालांकि इसके खोल और पत्तियों से भी सेहत को फायदे होते हैं।

अखरोट की तासीर


अखरोट की तासीर गर्म होती है। इसलिए इसको पानी में भिगो कर भी खाया जा सकता है।

अखरोट खाने के फायदे- Walnuts Benefits 


अखरोट सुखे मेवों या ड्राई फ्रूट्स (Dry Fruits) की श्रेणी में आता है। चमत्कारी गुणों की बदौलत इसे विटामिन्स का राजा कहा जाता है। फाइबर, हेल्दी फैट, विटामिन्स और मिनरल्स से भरपूर अखरोट सिर्फ दिमाग और मेमोरी के लिए ही फायदेमंद नहीं है बल्कि हमारी संपू्र्ण हेल्थ के लिए लाभकारी है।


आंख,बाल और त्वचा के लिए गुणकारी आखरोट


अखरोट में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट न केवल आपकी त्वचा को बेहतरीन बनाता है बल्कि आंखों और बालों के लिए भी फायदेमंद है। इसमें कई तरह के एंटीऑक्सीडेंट पाएं जाते हैं जो आपको जवान और बलशाली बनाए रखने के साथ ही सेहत को हेल्दी बनाता हैं।

दिमाग पर अखरोट के फायदे

अखरोट मस्तिष्क के आकार जैसा तथा उपरी परत भी मस्तिष्क जैसी मजबूत और कठोर होती है। यह फल दिमाग के लिए बहुत उपयोगी माना जाता है।
अखरोट का फल दिमाग को तरोताजा रखने और मजबूत बनाने में मदद करता है।

कैंसर से दूर रखेंगे अखरोट


अखरोट के नियमित सेवन से कैंसर का खतरा कम होता है। अखरोट में एंटीऑक्सीडेंट गुण पाये जातें हैं तथा विभिन्न प्रकार के विटामिन पाए जाते हैं जो कैंसर जैसी बिमारियों का खतरा कम करता है।

हड्डियों के लिए अखरोट है गुणकारी


हडि्डयों के लिए अखरोट का नियमित सेवन फायदेमंद माना जाता है।अखरोट कैल्शि‍यम का पुन: अवशोषण करने में सहायक है जो हड्ड‍ियों की मजबूती के लिए बेहद आवश्यक पोषक तत्व है।

पाचन शक्ति बढ़ाने में रामबाण अखरोट


फाइबर से भरपूर अखरोट का सेवन पाचन संबंधी समस्याओं में फायदेमंद है। यह कब्जियत को समाप्त कर पेट और आंतों की सफाई के लिए भी मददगार साबित होता है। किडनी स्टोन होने की स्थि‍ति में अखरोट का सेवन फायदेमंद है।

अखरोट खाने के नुकसान (Side Effects of Walnuts) 

अखरोट में कैलोरी ज्यादा मात्रा में होती है ऐसे में इसे नियमित और संतुलित रूप से खाना चाहिए। अधिक मात्रा में सेवन से आप वजन बढ़ सकता है। बहुत ज्यादा मात्रा में अखरोट खाने से दस्त या पेट से जुड़ी अन्य समस्याएं हो सकती हैं।


अंजीर Fig

Dry fig
अंजीर Fig


परिचय

अंजीर शहतूत परिवार में छोटी पेड़ प्रजातियों, फिकस कैरिका का खाद्य फल है। भूमध्यसागरीय और पश्चिमी एशिया में इसकी खेती प्राचीन से बहुतायत की जाती रही यह पेड़ अपने फल और सजावटी पौधे दोनों के लिए दुनिया भर में व्यापक रूप से उगाया जाता है।

अंजीर वानस्पतिक तथा वैज्ञानिक नाम


अंजीर का वानस्पतिक नाम (Botanical Name फाइकस केरिका, Ficus carica तथा अंग्रेजी में fig फिग कहा जाता है।

अंजीर की तासीर


अंजीर की तासीर गर्म होती है इसलिए ज्यादा खाने से पेट से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं या यह आंतों में गर्मी का कारण बन सकता है।

अंजीर खाने का तरीका


अंजीर का ताजा फल खाने योग्य है ही लेकिन यह फल विशेष ऋतु में होने के कारण इसे प्राकृतिक या कृत्रिम रूप सुखाकर मेवे के रूप में खाया जाता है। सुखे अंजीर के दो तीन पीस पानी में भिगो कर खाने से कब्ज़ और पाचन शक्ति के लिए उपयोगी माना जाता है

अंजीर खाने के फायदे Anjeer fig Benefits


अंजीर एक प्राकृतिक फल है जिससे अनेक लाभ हैं सुखे अंजीर की बात करें तो यह गैस कब्ज़ तथा अपच के लिए बहुत उपयोगी ड्राई फ्रूट है। इसके खाने के विभिन्न तरीके हैं
भीगे हुए अंजीर खाना सेहत के लिए फायदेमंद होता है‌। रात को 1 से 2 अंजीर को आधे कप पानी में भिगोकर कर रख सकते हैं तथा उसे सुबह खाली पेट सेवन करने से बहुत लाभ मिलता है।



अंजीर देता है भरपूर पोषक तत्व


अंजीर पोषक तत्वों की ख़ान है अंजीर में जिंक, मैंगनीज, मैग्नीशियम, आयरन जैसे मिनरल से पोषक तत्व होते हैं। इसमें एंटीऑक्सीडेंट और फाइबर जैसे गुण होते हैं। जो हमारे शरीर को हेल्दी और मजबूत रखते हैं तथा रोगों से बचाव करते है।


कब्ज में रामबाण अंजीर


अंजीर में फाइबर होता है, जो कब्ज की समस्या को दूर करने का काम करता है। कब्ज से जूझ रहे लोग इससे बचने और स्वस्थ आंत को बनाए रखने के लिए अपने नियमित संतुलित आहार में अंजीर को शामिल कर सकते हैं।

हृदय के लेकिन सेहतमंद अंजीर


अंजीर में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट ब्लड प्रेशर के स्तर को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं। अंजीर खाने से बल्ड सर्कुलेशन संतुलित रहता है जो ह्रदय की समस्यायों का खतरा कम करता है।


 हड्डियों को मजबूत करता है अंजीर


अंजीर में कैल्शियम होता है। ये हड्डियों को स्वस्थ रखने में मदद करता है। अंजीर हडि्डयों को मजबूत और शक्तिशाली बनाता है। हडि्डयों में आई दुर्बलता को दूर करता है।


अंजीर खाने के नुकसानः (Anjeer Khane Ke Nuksan)


अंजीर खाने से अनेक फायदे हैं लेकिन इसका अनियमित या अत्यधिक सेवन कुछ समस्या खड़ी कर सकता हैं। दूसरी ओर किसी प्रकार की बिमारी में अंजीर का सेवन सावधानी से करना चाहिए। अगर पहले से पथरी की समस्या है में अंजीर का सेवन उचित नहीं माना जाता है। अंजीर में ऑक्सलेट नामक तत्व होता है, जिससे अंजीर खाने से गुर्दे में पथरी की होने समस्या हो सकती है।
अधिक मात्रा में सेवन करने से पेट दर्द, पेट फूलने की समस्या हो सकती है। अंजीर में शुगर की मात्रा अधिक होती है इसलिए इससे दांतों के दर्द की समस्या हो सकती । अनियमित अंजीर खाने से माइग्रेन की समस्या भी हो सकती है।

केसर Saffron

Saffron
केसर kesar


परिचय
केसर पौधा दिखने में बहुत खुबसूरत सुगन्धित तथा औषधीय गुणों वाला होता है हम जो केसर उपयोग में लेते हैं वह इसके पुष्प की वर्तिकाग्र (stigma) से प्राप्त होती है जिसे केसर, कुंकुम, जाफरान अथवा अंग्रेजी में सैफ्रन (saffron) कहते हैं। केसर का मूल स्थान दक्षिण यूरोप है, लेकिन आजकल इसकी खेती स्पेन, इटली, ग्रीस, तुर्किस्तान, ईरान, चीन तथा भारत में होती है।
केसर का पौधा छोटे आकार का होता है। केसर का उपयोग विभिन्न औषधियों, और खाद्य पदार्थों में किया जाता है। केसर के फूल (saffron flower) नीले, बैंगनी, लाल-नारंगी रंग के होते हैं। केसर के वर्तिका.वर्तिकाग्र भाग उपयोग में लाये जाते हैं।

केसर का वैज्ञानिक वानस्पतिक नाम


केसर का वैज्ञानिक नाम क्रोकस सैटिवियस (Crocus sativus) है। केसर, कुंकुम, जाफरान अथवा सैफ्रन (saffron) इरिडेसी (Iridaceae) कुल की क्रोकस सैटाइवस नामक क्षुद्र वनस्पति है। 

केसर की तासीर


केसर की तासीर गर्म होती है इसलिए सर्दियों में इसका ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। 

केसर के फायदे (Kesar Benefits and Uses in Hindi)


केसर कमजोरी, सर्दी-जुकाम होने पर, या अन्य बीमारियों में केसर के सेवन करने की सलाह दी जाती है। क्योंकि केसर स्वास्थ्य के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। मासिक धर्म,घाव भरने,हेजा रोग,लीवर की समस्यायों, ह्रदय की समस्यायों , मानसिक विकार, सर्दी जुखाम आदि के लिए केसर किसी संजीवनी से कम नहीं है।

केसर के नुकसान 


केसर के अत्यधिक सेवन से त्वचा और आंखें पीली पड़ सकती है। इससे पीलिया एवं फूड प्वॉयजनिंग हो सकती है। केसर ब्लड प्रेशर को कम करती है अगर इसका आवश्यकता से अधिक लिया जाए तो ये शरीर के ब्लड प्रेशर को अचानक से कम कर देता है।

मूँगफली peanut /groundnut 

Peanut Groundnut
मुंगफली Mungfali


परिचय

मुंगफली एक तिलहन फसल है। मुंगफली का उत्पादन भारत सहित विश्व के कई देशों में होता है। भारत चीन के बाद मुंगफली के उत्पादन में दूसरे स्थान पर है। यह सुखे मेवों और नट्स के साथ साथ बहुपयोगी बीज है जिसमें तेल निकलता है जो खाने में पौष्टिक होता है। मुंगफली का पौधा मटर के परिवार से ताल्लुक रखता है कम ऊंचाई वाले इस पौधे की जड़ों में मुंगफली लगती है। कच्चे मुंगफली के दानों को सर्दियों में भूनकर खाना लाभदायक और स्वादिष्ट होता है। मूंगफली ओमेगा-6 फैटी एसिड से भरपूर होती है, जो शरीर के लिए बेहद फायदेमंद होती है।

मुंगफली वैज्ञानिक या वानस्पतिक नाम 


मुंगफली वैज्ञानिक या वानस्पतिक नाम  : Arachis hypogaea रेकिस हाइपोजिया है।

मुंगफली की तासीर


मूंगफली की तासीर गर्म होती है, इसलिए इसे सिर्फ सर्दियों में खाना ही फायदेमंद रहता है। 

मुंगफली खाने का तरीका 


मुंगफली पकने के बाद इसके दानों से तेल निकाला जाता है जो रसोई में उपयोग होता है। तथा इसके कच्चे दानों को भूनकर खाना बेहद टेस्टी होता है। साथ ही मुंगफली के दानों से विभिन्न व्यंजन तैयार किए जाते हैं। जिसमें गजक रेवड़ी आदि


मुंगफली के फायदे 


मूंगफली में मौजूद मैंगनीज रक्त में कैल्शियम के अवशोषण, फैट और कार्बोहाइड्रेट चयापचय और शर्करा के स्तर को संतुलित रखने में मदद करता है। 
मूंगफली को खाने से शरीर में खून की कमी भी पुर्ति हो जाती है। इसके अलावा इससे शारीरिक उर्जा और स्फूर्ती भी बनी रहती है। मुंगफली में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट, आयरन, फॉलेट, कैल्शियम और जिंक शरीर को कैंसर के जोखिम को कम करते हैं। भीगी हुई मूंगफली को गर्मियों में भी खाया जा सकता है। मुंगफली को भिगोकर खाने से शरीर में आयरन की कमी दूर होती है।

मुंगफली के नुक़सान


मूंगफली में संतृप्त वसा पाई जाती है जो दिल की बीमारियों का कारण बन सकती है। मूंगफली में लेक्टिन भी बहुद अधिक मात्रा में पाया जाता है, जिसे आसानी से पचाया नहीं जा सकता। मुंगफली का पाचन धीरे होने के कारण यह पाचन तंत्र में समस्या कर सकती है । अधिक मात्रा में मुंगफली खाने से मितली या उल्टी हो सकती है क्योंकि इसमें तेल पाया जाता है।
यदि आप बहुत ज्यादा मूंगफली खाते हैं तो इससे आपके लीवर में खराबी हो सकती है। 

छुआरे या छुहारे Dry Date

Dry date
Dry date छुहारे chhuhare


परिचय 

छुहारा खजुर का शुष्क रूप होता है । छुहारा खुश्क फलों में गिना जाता है, छुहारा एक तरह का सूखा मेवा है जो खजूर को सूखा कर बनाया जाता है। 

छूहारे वैज्ञानिक या वानस्पतिक नाम


वैज्ञानिक नाम- फीनिक्स डेक्टाइलीफेरा Phoenix dactylifera है । खजूर ताड़ की प्रजाति का वृक्ष होता है।जिसकी ऊंचाई अधिक होती है।

छूहारे की तासीर


छुहारे की तासीर गर्म होने से ठंड के दिनों में किया ग जाता है। छूहारे का सेवन नाड़ी के दर्द में भी आराम देता है l

छुहारे सेवन करने का तरीका


छुहारे गर्म दूध में कुछ देर डालकर इस दूध को पीये। यह शरीर को बहुत मात्रा में प्रोटीन देता है।छुहारे का उपयोग मीठे व्यंजनों के डालकर सेवन कर सकते है। छुहारे को सीधे ही खाया जा सकता है। खाने में मीठा और स्वादिष्ट होता है।

छुहारे खाने के फायदे


छुहारा में भरपूर मात्रा में पौष्टिक तत्व पाए जाते है। इसमें कार्बोहाइड्रेट, शुगर, फाइबर और प्रोटीन जैसे कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। खनिजों में सिलेनियम, कॉपर, पोटैशियम, मैग्नीशियम, मैंगनीज, आयरन, फास्फोरस, कैल्शियम और बोरोन और विटामिन में राइबोफ्लेविन, पाइरिडोक्सिन, नियासिन, फोलिक एसिड, विटामिन ए और विटामिन सी आदि है। जो हमारे शरीर को तन्दुरूस्ती तथा निरोगी बनाता है।


त्वचा के लिए उपयोगी छुहारे


त्वचा को स्वस्थ बनाये रखने के लिए छुहारा बहुत फायदेमंद होता है। इसमें कई तरह के पोषक तत्व है जो त्वचा को पोषक तत्व प्रदान करते है जिससे त्वचा स्वस्थ और दमकती दिखने लगती है। 


ह्रदय , हडि्डयों और मांसपेशियो को मजबूत बनाएं छुहारा


छुहारा का सेवन रोजाना करने से मांसपेशिया मजबूत होती है। इसमें उच्च मात्रा में केल्शियम, पोटेशियम उपस्तिथ है। शारीरिक मांसपेशियो के साथ-साथ हृदय को स्वस्थ रखने में मदद करता है। दूध के साथ छुहारा का सेवन करे और हड्डियों को मजबूत बनाता है।

छुहारे के नुकसान


छुहारा को सीमित मात्रा करना चाहिए क्योंकि अधिक मात्रा में करने से पेट फूलने लगता है। खजूर की तासीर गर्म होने के कारण यह आंतों की गर्मी का कारण बन सकता है।
छुहारा को अधिक मात्रा में सेवन करने से ब्लड शुगर का स्तर कम हो सकता है। इसलिए छुहारे का सेवन लिमिट में करना चाहिए।

पिस्ता pistachios

Pistachio
पिस्ता Pista


परिचय

पिस्ता pistachios हरे रंग का सूखा मेवा dry fruit है। इसका प्रयोग मिष्ठान व्यंजनों का स्वाद व सुन्दरता बढ़ाने के लिए किया जाता है। विभिन्न फायदों के कारण यह ड्राई फ्रूट्स में एक खास स्थान रखता है। पिस्ता पोषक तत्वों से भरपूर होता है। इसका सेवन वजन को संतुलित करने से लेकर, रक्तचाप व इंसुलिन के स्तर को नियंत्रित रखने तक किया जा सकता है। यह ईरान, अफगानिस्तान, सयुंक्त राज्य अमेरिका और सीरिया में बड़े स्तर पर पाया जाता है। दुनिया में सबसे ज्यादा पिस्ते की पैदावार ईरान में होती है।


पिस्ता का वैज्ञानिक या वानस्पतिक नाम

पिस्ता का वैज्ञानिक नाम पिस्टेसिया वेरा (Pistacia vera) है। 

पिस्ता की तासीर 

पिस्ते की तासीर गर्म होती है इसलिए गर्मियों में इसका सेवन सावधानी से करना चाहिए।

पिस्ता खाने का तरीका


पिस्ता स्वाद में नमकीन और स्वादिष्ट होता है। इसके दानों को खाया जाता है। तथा पिस्ता गिरी की कतरन को खीर या किसी मिठाई में डाल कर या दूध के साथ खाया जा सकता है। या इसके दाने सुबह जल्दी खाने से भी फायदेमंद रहता है।


पिस्ता खाने के फायदे


पिस्ता सेवन करने के अनेक फायदे हैं यह प्रकृति का दिया हुआ स्वादिष्ट और औषधीय मेवा है। जिसके निम्न फायदे हैं।



रक्त अल्पता या एनीमिया में पिस्ता बहुत लाभदायक


पिस्ते Pistachio में कॉपर होता है, जिससे यह भोजन में मौजूद आयरन के अवशोषण में मदद करता है। इससे खून की कमी दूर होती है और रक्त अल्पता या एनीमिया में फायदा होता है। इसमें विटामिन बी होता है, जो रक्त में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाने में मददगार है।


पिस्ता वजन नियंत्रित करने में रामबाण


पिस्ता Pistachio में पर्याप्त मात्रा में फाइबर होता है। फाइबर से हमें लंबे समय तक पेट भरा होने का एहसास होता है। इस वजह से हमें अधिक खाने का मन नहीं होता और जल्दी भूख नहीं लगती जिससे हमारा वजन नियंत्रित रहता है। पिस्ता वजन को नियंत्रित रखने में सहायक है।

पाचनतंत्र की मजबूती के लिए पिस्ता रामबाण


पिस्ता Pistachio में अच्छी मात्रा में फाइबर होने के कारण यह हमारी पाचन समस्याओं को ठीक करने में भी मददगार साबित होता है। एक औंस पिस्ता में लगभग 3 ग्राम तक फाइबर आहार होता है। इसका इस्तेमाल कर हम पाचन संबंधी परेशानी से बच सकते हैं।

कोमल और दमकती त्वचा के लिए पिस्ता वरदान


पिस्ता Pistachio का नियमित सेवन करने से त्वचा का रूखापन दूर होता है। विटामिन ई की भरपूर मात्रा होने के कारण पिस्ता का तेल भी त्वचा के लिए फायदेमंद होता है। यह एक प्रभावी प्राकृतिक स्रोत है। इसके तेल से त्वचा मुलायम और चमकदार बनती है।

डायबिटीज़ या मधुमेह में पिस्ता उपयोगी


मधुमेह के रोगियों के लिए भी पिस्ता फायदेमंद होता है। पिस्ता का सेवन मधुमेह रोगियों में ग्लाइसेमिक स्तर, रक्तचाप, सूजन और यहां तक कि मोटापे को रोकने के लिए काफी फायदेमंद है।

कैंसर में लाभदायक पिस्ता


 पिस्ता Pistachio में मौजूद सेलेनियम कैंसर को रोकने में मदद करता है। क्योंकि कैंसर से शरीर में बहुत कमजोरी आ जाती है तथा पाचन शक्ति भी कमजोर हो जाती है पिस्ते के सेवन से शरीर में फाइबर की मात्रा से गैस कब्ज की समस्या भी नहीं होती है तथा शरीर को पर्याप्त ऊर्जा मिल जाती है। पिस्ता में फाइबर होने से गैस कब्ज की समस्या नहीं रहती । पिस्ता के नियमित सेवन से आंत मजबूत होती है जिससे पेट के कैंसर का खतरा भी कम होता है।



पिस्ता खाने के नुक़सान

Disadvantages of eating pistachios

पिस्ता फायदेमंद तो है लेकिन कुछ कारणों की वजह से या अधिक मात्रा में सेवन करने से निम्न समस्याएं उत्पन्न हो सकती है। जिस व्यक्ति को मूंगफली से एलर्जी हैं, तो उसे पिस्ता नहीं खाना चाहिए। इससे खाँसी, छींक, चकत्ते और चेहरे की सूजन जैसे लक्षण पैदा कर सकते हैं। पिस्ता अधिक मात्रा में खाने पर तेजी से एनाफिलेक्सिस नामक एक गंभीर एलर्जी भी पैदा कर सकते हैं।


अस्वीकरण: इस लेख की सामग्री केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श लें। जागृति पथ वेबसाइट इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
यह जानकारी केवल खान पान और फल-मेवे की विशेषताओं के बारे में है । बाकी रोग और अन्य किसी बिमारियों में खान पान तथा अन्य बातों के लिए डाक्टर की सलाह ही सर्वोत्तम और सर्वोपरि होती है। हर व्यक्ति के शरीर की विशेषताएं जैसे कोई खाद्य पदार्थ छूट नहीं करें या किसी चीज को खाने से एलर्जी हो आदि अलग-अलग है इसलिए यह जानकारी सार्वभौमिक नहीं है । जहां तक अपने शारीरिक क्षमता और मौसम की विशेषता अनुसार किसी फल या मेवे का सेवन किया जाए तो बेहतर हैं। 
Disclaimer: This Article material, provides  general information only. It is by no means a substitute for qualified medical opinion. Always consult an expert or your doctor for further details. Jagriti Path website does not claim responsibility for this information.
 This information is only about the characteristics of food and fruits and nuts. In other diseases and any other diseases, the advice of the doctor for food and other things is the best and paramount. Each person's body characteristics such as whether to avoid certain foods or be allergic to certain foods are different, so this information is not universal. As far as consuming any fruit or nuts according to your physical capacity and the specialty of the season, it is better.

2 comments:


Post Top Ad