ऐलोवेरा या ग्वारपाठा : अनेक रोगों के लिए है रामबाण औषधी: फायदे,नुकसान तथा घृतकुमारी का हलवाJagriti PathJagriti Path

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Thursday, July 1, 2021

ऐलोवेरा या ग्वारपाठा : अनेक रोगों के लिए है रामबाण औषधी: फायदे,नुकसान तथा घृतकुमारी का हलवा

Benifits side effects Aloe Vera
एलोवेरा, धृत कुमारी, ग्वारपाठा Advantages and disadvantages of aloe vera, precautions in using and method of making aloe vera pudding

एलोवेरा, धृत कुमारी, ग्वारपाठा फायदे नुकसान और सेवन की सावधानियां

ऐलोवेरा का सेवन कब करें?
ऐलोवेरा का जूस कब पिए?
ऐलोवेरा का सेवन कब नहीं करना चाहिए?
मैं गर्भवती हूं तो एलोवेरा जूस पी सकती हूं?
ऐलोवेरा नुकसान कब करता है?
क्या एलोवेरा से पौरुष शक्ति बढ़ती है?
ऐलोवेरा कैसे उगाएं?
ग्वारपाठे को कैसे खाएं?
ऐलोवेरा का हलवा कैसे बनाएं?
ऐलोवेरा का कौनसा भाग सेवन करें?
क्या कील मुंहासों के लिए एलोवेरा फायदेमंद है?
ऐलोवेरा से चेहरे की खूबसूरती कैसे बढ़ाएं?
When to consume aloe vera?
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ऐसे बहुत कम ही लोग होंगे जो घृतकुमारी एलोवेरा या ग्वारपाठा का नाम ना सुना हो। यह साधारण पौधा नहीं बल्कि एक जड़ी बूटी के समान है। अधिकार हम हम हरे ग्वार पाठे को देखते हैं। जो जमीन से सीधा कठोर पत्तियों के रूप में निकलता है। यह एक ऐसा पौधा है जिसे हम अपने घर की छतों, बाग-बगीजों गमलों पर आसानी से उगाते सकते हैं एलोवेरा औषधीय गुणों की खान है जब आप एलोवेरा के गुणों या एलोवेरा के इस्तेमाल के बारे में जानेंगे तो आश्चर्य में पड़ जाएंगे कि एक पौंधा और ढेर सारे गुण! 


एलोवेरा क्‍या है What is Aloe Vera?


एलोवेरा का पौधा छोटा होता है जिसके पत्‍ते मोटे, गूदेदार होते हैं और यह चारो तरफ लगे होते हैं। एलोवेरा (Aloe Vera) के पत्‍ते के आगे का भाग नुकीला होता है और इसके किनारों पर हल्‍के कांटे होते हैं। पत्‍तों के बीज से फूल का दंड निकलता है जिस पर पीले रंग के फूल लगे होते हैं।
दुनिया भर के विभिन्‍न हिस्‍सों में पाए जाने वाले एलोवेरा को देश-विदेश के अलग-अलग हिस्‍सों में कई नामों से जाना जाता है। इसका वानस्‍पतिक नाम Aloe vera है ,इसे संस्कृत में कुमारी, गृहकन्या, कन्या, घृतकुमारी भी कहते हैं।
एलोवेरा, धृत कुमारी, ग्वारपाठा को अंग्रेजी भाषा में : Aloevera कहा जाता है, इसका वैज्ञानिक नाम Scientific Name : Aloe Barbadensis Miller एलो बारबाडेंसिस मिलर हैं। यह अपनी प्रजाति के एस्फोडेलेसी Asphodelaceae परिवार से ताल्लुक रखता है।

 
इन समस्याओं में एलोवेरा है रामबाण


 सिर के दर्द ,नेत्र रोग (आंखों की बीमारी) 
कान दर्द , खांसी-जुकाम, बुखार,पेट की बीमारी तिल्‍ली (प्लीहा) की वृद्धि , खूनी बवासीर,पीलिया,लीवर विकार,मूत्र रोग,डायबिटीज या मधुमेह , मासिक धर्म संबंधी विकार,चेचक के घाव,कील मुहांसे, गठिया आदि

एलोवेरा के फायदे Aloe Vera Benefits and Uses


ग्वारपाठा या एलोवेरा दिखने में तो साधारण पौधा लगता है लेकिन यह औषधीय गुणों से भरपूर होता है। आसानी से उगाया जाने वाला यह पौधा आप किसी बगीचे में जरूर दिख जाएगा। लेकिन इसके विभिन्न गुणों का सही उपयोग करना बहुत कम लोग ही जानते हैं। डायबिटीज़ के रोगी एलोवेरा का हल्वा बनाकर नियमित सेवन करते हैं। जिससे वो इस बिमारी को काफी हद तक कम कर लेते हैं।
ग्वारपाठे में एंटी-ऑक्सीडेंट के गुण पाए जाते हैं जो शरीर में मौजूद सूजन को कम करने में सहायक होते हैं। इसके लिए रोजाना सुबह में खाली पेट एलोवेरा जूस का सेवन करना चाहिए। लेकिन ध्यान रहे आपके शरीर को एलोवेरा छूट करें तभी सेवन करना चाहिए। ऐलोवेरा सेवन से घाव को भरने में भी मदद मिलती है। इसके साथ ही रोजाना एलोवेरा जूस पीने से सिरदर्द और तनाव से भी मुक्ति मिलती है।

सिरदर्द में ग्वारपाठा का प्रयोग लाभदायक Benefits of Aloe Vera in Relief from Headache 


ऐलोवेरा के गूदे में थोड़ी मात्रा में दारु हल्‍दी का चूर्ण मिला कर इसे गर्म करके दर्द वाले स्‍थान पर बांधने से वात और कफ से होने वाले सिरदर्द में राहत मिलती है।

पीलिया में ऐलोवेरा है संजीवनी Aloe Vera Uses in Fighting with Jaundice 


ऐलोवेरा के रस को दिन में दो तीन बार पीने से पीलिया में लाभ होता है इससे आंखों का पीलापन यानी पीलिया दूर होता है। ऐलोवेरा सेवन करने से लीवर, तिल्‍ली का बढ़ाना, पेट की गैस, पेट में दर्द तथा अन्‍य पाचन से जुड़ी समस्‍याओं में लाभ होता है।

तिल्‍ली (प्लीहा) बढ़ने पर एलोवेरा का उपयोग होता है कारगर Benefits of Aloe Vera in Spleen 


10-20 मिलीग्राम घृतकुमारी या एलोवेरा के रस में 2-3 ग्राम हल्दी चूर्ण मिलाकर सेवन करने से तिल्‍ली वृद्धि में लाभ होता है। साथ ही गैस अपच की समस्यायों में एलोवेरा बहुत उपयोगी सिद्ध होता है।


खांसी-जुकाम में कारगर ऐलोवेरा Aloe Vera Uses in Cures Cough and Cold problem 


ग्वारपाठे की की लसदार गुदा तथा सेंधा नमक लेकर दोनों का भस्म तैयार करें। इस भस्‍म का 5 ग्राम की मात्रा में मुनक्का के साथ सुबह-शाम सेवन करने से पुरानी खांसी तथा जुकाम में आराम मिलता है।


पेट की बीमारी में करें एलोवेरा का इस्‍तेमाल Aloe Vera in Abdominal Disease


ग्वारपाठे की 10-20 ग्राम जड़ को उबाल कर, इसे छानकर इसमें भुनी हुई हींग मिलाकर पीने से पेट दर्द में आराम मिलता है। 
गाय के घी में 5-6 ग्राम घृतकुमारी के गूदे में त्रिकटु सोंठ, मरिच पिप्‍प्‍ली, हरड़ तथा सेंधा नमक का चूर्ण मिला लें। इसका सेवन करने से वायु की गांठ में लाभ होता है।
60 ग्राम घृतकुमारी के गूदे में 60 ग्राम घी, 10 ग्राम हरड़ चूर्ण तथा 10 ग्राम सेंधा नमक मिला लें। इसे अच्छी तरह मिलाना है। इसको 10-15 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम गुनगुने पानी के साथ सेवन करने से वात से होने वाले गुल्म से निजात मिलता है।

खूनी बवासीर में ग्वार पाठा देता है राहत Aloe Vera in Cure Piles 


एलोवेरा (Aloe Vera) के 50 ग्राम गूदे में 2 ग्राम पिसा हुआ गेरू मिलाएं। अब इसकी गोलियां बना लें। इसे रूई के फाहे पर फैलाकर गुदा स्‍थान पर लंगोट की तरह पट्टी बांधें। इससे मस्‍सों में होने वाली जलन और दर्द में आराम मिलता है। मस्‍से सिकुड़ कर कम हो जाते हैं। यह तरीका खूनी बवासीर में भी लाभदायक है।

ऐलोवेरा या गवारपाठे के नुकसान Side effects of aloe vera


ग्वारारपाठा या घृतकुमारी को अनेक रोगों के लिए संजीवनी कहा जाता है हम जानते हैं कि एलोवेरा मधुमेह,पेट संबंधी विकार, सौन्दर्य प्रसाधन निर्माण तथा अनेक रोगों के इलाज में काफी उपयोगी होता है। लेकिन हमें यह भी जानना जरूरी है कि एलोवेरा के कुछ साईड इफेक्ट भी है। या यूं कहें कि एलोवेरा का अनियमित सेवन खतरनाक भी हो सकता है। कुछ स्थितियों में एलोवेरा फायदे की जगह नुकसान पहुंचाता है। इसलिए एलोवेरा का उपयोग करते समय अपनी शारीरिक स्थिति के बारे में डाक्टर की सलाह लें। इसके साथ-साथ किसी बिमारी तथा दवाइयों के सेवन करते समय एलेवेरा का सेवन डाक्टर की सलाह बगैर कभी नहीं करें। आइए जानते हैं ग्वारपाठे के नुक्सान या साईड इफेक्ट क्या क्या है।


गर्भवती महिलाएं एलोवेरा से करें परहेज


गर्भवती महिलाएं और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को ऐलोवेरा के जूस का सेवन नहीं करना चाहिए। इससे गर्भवती महिलाओं में गर्भाशय के संकुचन का खतरा रहता है और गर्भपात और जन्म दोष हो सकता है। साथ ही स्तनपान करवाने वाली माताओं और बहिनों को ऐलोवेरा के जूस से परहेज़ करना चाहिए।

इन बिमारियों में ना करें एलोवेरा का सेवन


हालांकि एलोवेरा का नियमित सेवन फायदेमंद माना जाता है, लेकिन कुछ मामलों में एलोवेरा का सेवन करने से बचना चाहिए क्योंकि यह समस्या पैदा कर सकता है अगर आपकी आंतों में घाव हो या आंतों में कोई ट्युमर हो तो एलोवेरा के सेवन से बचना चाहिए या फिर डाक्टर की सलाह लेकर ही कोई फैसला करना चाहिए। साइड इफेक्ट्स या दुष्प्रभाव की बात करें तो एलोवेरा में लेटेक्स पाया जाता है जो कि कोलाइटिस, क्रोहन रोग, एपेंडीसिटीस, डायवर्टिकुलोसिस, आंतों की बाधा, रक्त स्राव, पेट दर्द और अल्सर जैसी समस्याएं का भी कारण बन सकता है। एलोवेरा की पत्ति के अंदर लैक्सेटिव की लेयर पाई जाती है, जो स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं होती है। इसलिए ग्वारपाठे या एलोवेरा का उपयोग सावधानी से करना चाहिए। अधिक मात्रा में एलोवेरा का इस्तेमाल करने से शरीर को नुकसान हो सकता है। 

IBS की समस्या में नहीं करें ऐलोवेरा का सेवन


एलोवेरा जूस का अधिक सेवन करने से इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम यानी IBS की समस्या हो सकती है. जिन लोगों को इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम यानी IBS या पाचन संबंधित समस्याएं हैं उन्हें एलोवेरा जूस के सेवन से परहेज करना चाहिए।

ऐलोवेरा से डिहाइड्रेशन का खतरा


अक्सर लोग वज़न कम करने के उद्देश्य से सुबह सुबह एलोवेरा का जूस पीते हैं। हम जानते हैं कि अनियमित सेवन से स्कीन पर एलर्जी या लाल चकत्ते भी पड़ जाते हैं। लेकिन सबसे बड़ी समस्या डिहाइड्रेशन की है जो एलोवेरा का अधिक सेवन करने से उत्पन्न हो सकती है।
कई लोग स्वस्थ रहने के लिए सुबह- सुबह एलोवेरा जूस का सेवन करते हैं, परंतु इसका अधिक सेवन करने से स्वास्थ्य को नुकसान हो सकता है।


ऐलोवेरा का स्वादिष्ट हलवा डायबिटीज में रामबाण


ऐलोवेरा एक औषधीय गुणों वाला पौधा है ही लेकिन इसके सेवन करने की की विधियां भी है। सावधानी और नियमित सेवन से एलोवेरा फायदा ही पहुंचाता है। अब बात करेंगे ऐलोवेरा के हल्वे की आप यह सुनकर शायद अचंभित हुए होंगे कि भला ऐलोवेरा का भी हल्वा बनता है। जी हां! तो बता दे कि एलोवेरा का हल्वा भी बनता है। आप ऐलोवेरा की सब्जी और एलोवेरा के लड्डू भी बनाकर खा सकते हैं।
लेकिन यहां बात करेंगे एलोवेरा के हलवे की तथा इसे बनाने की विधि की तो आइए जानते हैं आखिर ग्वारपाठे का हलुआ कैसे बनाते हैं। ग्वारपाठे का हल्वा बनाने के लिए आवश्यक सामग्री ग्वारपाठे या एलोवेरा का गूदा, मैदा, चीनी और देशी घी आवश्यक होता है। इसे बनाने में आप यह सरल विधि प्रयोग कर सकते हैं जिसमें सबसे पहले एलोवेरा का गूदा हाथों से मलकर पेस्ट बना लें। ऐलोवेरा को बारिक काट लें कल फिर कढ़ाही में घी डालकर गर्म करें जब घी गरम होने लगे तब एलोवेरा का गूदा डालकर कम आँच पर पकायें। पकने पर मैदा और चीनी डालकर मिक्स करते रहे अंत में थोडा सा पानी मिलाकर हलवे जैसा बना लें। इस प्रकार के हलवे का प्रयोग डायबिटीज के रोगियों को करना चाहिए । लेकिन ध्यान रहे किसी भी समस्या या शंका की स्थति में खान पान के मामले में डाक्टर की सलाह जरूर लें लें।


Disclaimer:-
The content of this article is information only. This is not the advice and suggestion of a trained specialist doctor. The entire writing material related to Aloe Vera in this article is meant for general knowledge only. This website is not responsible for any problems that may occur after following this. Therefore, please take a decision on the advice of your doctor in any food related problem or symptoms of the disease. Due to the different physical abilities and characteristics of each person, doctor's advice is the best option in your diet.

अस्वीकरण:-
इस लेख की सामग्री केवल जानकारी मात्र है। यह किसी प्रशिक्षित विशेषज्ञ डाक्टर की सलाह और सुझाव नहीं है।इस लेख में एलोवेरा से संबंधित सम्पूर्ण लेखन सामग्री केवल सामान्य ज्ञान के रूप में हैं। इसका अनुसरण करने पर होने वाली किसी समस्या के लिए यह बेवसाइट जिम्मेदार नहीं हैं। इसलिए कृपया किसी भी खान पान संबंधित समस्या या बिमारी के लक्षणों में अपने डाक्टर की सलाह से ही फैसला लें। प्रत्येक व्यक्ति की शारीरिक क्षमताएं एवं विशेषताएं अलग होने के कारण अपने खान पान की चीजों में डाक्टर की सलाह सर्वोत्तम विकल्प है।

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