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Thursday, June 10, 2021

क्या है बाज का पुनर्जन्म या पुनर्स्थापना? पढ़िए इस खुंखार पक्षी के हिम्मत और हौसलों के पीछे की कहानी

reincarnation of eagle
reincarnation of eagle बाज का पुनर्जन्म 

बाज,चील, शाहीन ईगल


पशु पक्षियों की बात हो तो सबसे पहले हमारे जहन में मांसाहारी तथा शाकाहारी का सवाल आता है। मांसाहारी पशुओं में चीता खुंखार है तो पक्षियों में बाज के शिकार का तो कहना ही क्या पलक झपकते ही शिकार को शिंकजे में ले लेता है जिसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते। हौसला जूनून और जज्बा अगर समझना है तो बाज के जीवन के बारे में जरूर जानना चाहिए। बाज के इस गौरवशाली जीवन को देखकर हम सोचते होंगे की प्रकृति ने इसको शक्ति प्रदान की है। लेकिन हम यह नहीं जानते हैं कि बाज के इस जांबाजी अंदाज के पीछे उसकी कहानी क्या है? यह पक्षी अपने जीवन में कितना संघर्ष करता है? आइए जानते हैं बाज की इस अद्भुत शक्ति के पीछे उसका त्याग और संघर्ष कितना विचित्र और अनौखा है।

बाज का जीवन काल, प्रजाति एवं प्रजनन


ईगल या चील बाज परिवार ( Accipitridae) से संबंधित उड़ने वाले पक्षियों में से एक ताकतवर और विख्यात पक्षी है। यह खाद्य श्रृंखला के शीर्ष पर हैं, इनकी कुछ प्रजातियां बड़े बड़े शिकार तथा शिकार करने की जबरदस्त फुर्ती और चालाकी के लिए विख्यात है। यह भेड़ियों के बच्चे तथा हिरणों के बच्चों तथा बंदरों और सांपों के शिकार को भोजन बनाते हैं। यह मांसाहारी पक्षी अन्य पक्षियों, समुद्री जीवों तथा अन्य छोटे मोटे जीवों को अपना भोजन बनाते हैं।
यह शक्तिशाली पक्षी लगभग 6 किलो तक का वजन उठा कर आसमान में उड़ सकता है। बाज परिवार के कुछ जातियों का जीवन काल लगभग 30 से 40 वर्ष माना जाता है लेकिन ईगल पक्षी लगभग 70 से 100 वर्ष की आयु तक जीवित रह सकता है। गौरतलब हैं कि 40 वर्ष की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते उसके पंख कमजोर होते जाते हैं और उसे उड़ान भरने में तकलीफ होने लगती है। लेकिन यह पक्षी पूनर्जन्म के कठीन चक्र से गुजर कर लम्बा जीवन जी सकता है जिसकी बात आगे करेंगे। बाज पक्षी के आकाश में उड़ने की बात करें तो यह तकरीबन 1000 से 12000 फीट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है। यह पक्षी वर्षों में बादलों के ऊपर उडने का माद्दा रखते हैं। प्रजनन की बात करें तो मादा बाज ज्यादा अंडे नहीं देती वह केवल 3 या 5 अंडे देती है। माता बाज अपने अंडों के उपर 36 दिन बैठकर उसे सेंक देती है। उसके बाद उसमें चूजे निकलते हैं। मां सूजो को उड़ने का कठिन प्रशिक्षण देती हैं।



बाज की शुरुआती खतरनाक ट्रेनिंग


माना जाता है कि यह खुंखार पक्षी अपनी मां से प्राप्त सख्त प्रशिक्षण से शिकार सिखता है तथा उड़ान भरना सीखते हैं।
बताया जाता है कि अपरिपक्व सूजे को उसकी मां पंजे में पकड़ कर ऊंचाई में ले जाकर नीचे छोड़ देती है। बड़ी ऊंचाई से जब नन्हे बाज को छोड़ा जाता है तो वह डर जाता है धरती के क़रीब आते आते कंजाइन से जकड़े उसके पंख खुलने लगते हैं। जब वह स्वयं उड़ नहीं सकता है तथा पृथ्वी पर गिरने से पहले उसकी मां उसके ऊपर साथ साथ उड़ती हुई नीचे की ओर आकर उसे पकड़ लेती है यह प्रक्रिया तब तक दोहराई जाती है तब तक नन्हा बाज उड़ना ना सीख जाएं। जीवन के शुरुआत में ही उसे इस प्रकार की कठिन ट्रेनिंग दी जाती है। 



बाज का पुनर्जन्म या पुनर्स्थापना


बाज या शाहीन की खौफनाक झड़प और झटके में शिकार करने की प्रवृत्ति से खौफ का मंजर रहता है लेकिन 30-40 वर्ष की आयु यह स्वाभिमानी पक्षी कमजोर होने लगता है इसकी नुकीली चोंच मुड़ जाती है जिसमें शिकार को चीरने की शक्ति नहीं रहती। पंजे लम्बे और कमजोर पड़ने लगते हैं। पंख भारी पड़ने लगते हैं जिससे वो पहले की तरह शिकार नहीं कर पाता है। इस अवस्था में बाज के सामने तीन विकल्प होते हैं पहला की वह भूख से प्राण त्याग दें,दूसरा वह किसी अन्य शिकारी के शिकार को खाने लगे या गिद्ध की तरह मृत जीवों को खाकर जीवन यापन करें तीसरा और अन्तिम विकल्प सबसे कठिन होता है कि वह अपने शरीर के तीन महत्वपूर्ण अंगों को पुनर्स्थापित कर दें, पहले दो विकल्प बहुत आसान है जबकि तीसरा विकल्प बहुत पीड़ादायक और कठिन । लेकिन स्वाभिमानी और जांबाज यह पक्षी तीसरे रास्ते को ही चुनता है और चट्टान की ऊंचाई पर घौंसला बनाकर अपनी सबसे पीड़ादायक चुनौती को स्वीकार करके स्वीकार करता है। सबसे पहले वह अपनी चोंच को चट्टान पर पटक पटक कर लहुलुहान कर के तोड़ देता फिर अपनी नई चोंच उगने का इन्तजार करता है। फिर अपने पंजों को चट्टान पर तोड़ देता है जिससे उसके कमजोर और मुड़े हुए पंजों की जगह नवीन पंजे आ जाते हैं ‌। इसके बाद वह अपनी नुकीली चोंच से कमजोर और भारी पंखों को एक एक करके नोच कर तोड़ देता है। एक लम्बी पीड़ादायक अवधि और दर्दनाक लहुलुहान हालत से उबरने लगता है और पंख भी उगने लगते हैं। इस प्रकार लगभग 150 दिनों तक चलने वाला कष्टदायक चरण पूरा होता है। इस अवस्था में वह अपने पुनर्स्थापन काल में तीन महत्वपूर्ण अंगों को पुनर्स्थापित कर लेता है। यहां से बाज के जीवन में एक नया और ऊर्जावान सफ़र शुरू होता है। इसके बाद वह अपने आगे के जीवन को बड़ी शान से जीता है तथा उसी खूंखार अंदाज में शिकार करने लगता है। यह बाज के जीवन की अनौखी और विचित्र रचना होती है जो अन्य पक्षियों में बहुत कम ही देखी जाती है। लेकिन यह बाज की पुनर्स्थापना की कहानी मानव जीवन में चुनौतियों का सामना करने में और संघर्ष करके मन्जिल प्राप्त करने में बहुत प्रेरणादायक है। इसलिए कहा जाता है कि बाज एक ऐसा पक्षी है जो एक ही जीवन में दो बार जन्म लेता है। एक जब वो पैदा होता है और दूसरा, जब वो वृद्धावस्था के मुकाम पर पहुंचकर यह निर्णय लेता है कि उसे जीवन जीना है या फिर अपने अंत समय की प्रतीक्षा में समय व्यतीत कर देना है। या खुद को पुनर्स्थापित करना है।

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