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Wednesday, June 30, 2021

संवेदीगामक या इन्द्रियानुगतिक अवस्था जन्म से 2 वर्ष Sensory Motor Stage जीन पियाजे Piaget Theory

Sensory Motor stage
cognitive development Sensory Motor

संज्ञानात्मक विकास संवेदीगामक या इन्द्रियानुगतिक अवस्था


बालक के जन्म से शुरू होने वाले विकास में वृद्धि सहित कई परिवर्तन होते हैं। जिसमें कुछ विशिष्ट प्रकार के विकास, संवेग Emotion, संज्ञानात्मक विकास आदि परिवर्तन देखने को मिलते हैं। इसमें एक महत्वपूर्ण विकास है वह संज्ञानात्मक विकास क्योंकि आगे चलकर संज्ञानात्मक विकास अधिगम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पियाजे सर ने संज्ञानात्मक थ्योरी पर आधारित बहुत शानदार ढंग से विश्लेषण किया है। तो आइए आज जानते हैं संज्ञानात्मक विकास की पहली अवस्था के बारे में विस्तृत जानकारी , क्योंकि रीट या अन्य शिक्षक भर्ती परीक्षा में संज्ञानात्मक विकास से जुड़े प्रश्न आते हैं जिनमें सिद्धान्त एवं कथनों में अभ्यर्थियों में बहुत कंन्फ्यूज्न रहता है। अगर शिक्षा मनोविज्ञान और बाल विकास शिक्षा शास्त्र के सभी टापिक्स को ध्यानपूर्वक समझकर दिमाग में सरल तरीके से इनपुट करेंगे तो परीक्षा में आउटपुट बहुत ही शानदार रहेगा।

इन्द्रियानुगतिक (Sensory Motor) अवस्था


इन्द्रियानुगतिक अवस्था में बच्चा किसी वस्तु को देखकर , सुनकर ज्ञान प्राप्त करता हैं। इस अवस्था में बालक अपनी ज्ञानेन्द्रियो से प्राप्त सूचनाओं के अनुसार प्रतिक्रिया देने लगता है। छोटा-सा बालक जब पालने में सो रहा होता है तब उसके आसपास उसकी मां हंसने लगती है या ऐसी कोई क्रिया करती है तो वह बालक भी सिर्फ हंसी सुनकर खुद मुस्कुराते लगता है जबकि वह कारण नहीं जानता होता है। मतलब बच्चा वस्तु को देखकर और सुनकर ही उस वस्तु को महसूस करने की कोशिश करता हैं। जैसे अगर बच्चे के सामने कोई हाथ हिलाए तो वो भी बिना सोचे ही हाथ हिलाते लगता हैं बिना सोचे समझे अर्थात वह उसका अनुकरण करता हैं। यह अवस्था इंद्रियों के अनुसरण पर आधारित होने के कारण संवेदीगामक अवस्था या इन्द्रियानुगतिक अवस्था कहते हैं।
इन्द्रियानुगतिक अवस्था की आयु सीमा की बात करें तो इसकी अनुमानित उम्र जन्म से 2 वर्ष तक मानी जाती है। पियाजे के अनुसार जन्म से 2 वर्ष तक बालक इन्द्रियानुगतिक पर आधारित व्यवहार करता है। यह संज्ञानात्मक विकास की पहली अवस्था मानी जाती है

प्रमुख लक्षण या विशेषतायें (Level) एवं विचार (Thought)

  
1.मुख्य रूप से क्रियाओं द्वारा घटित होता है। 
2. ज्ञानेन्द्रिय अदाओं (Inputs), का सहयोजन (Co-Ordination) प्रगति करता है। 
3. शारीरिक अनुक्रियाओं का सहयोजन प्रगति करता है। 
4.कुछ चीजों एवं लोगों में एक दूसरे से प्रमेदन एवं स्थायी पहचान (Receignitirin), पर्व प्रतिक्रिया करता है। 

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