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Tuesday, December 31, 2019

भिन्न भिन्न संगठनों में बिखरता एकता का प्रतीक भारतीय समाज

Indian social unity
भारतीय एकता में भिन्न भिन्न संगठन


ये हम किस युद्ध की तैयारी कर रहे हैं?
संविधान में मौलिक अधिकारों के 19 (1) स में निशस्त्र और शान्ति पूर्वक संगठन या NGO बनाने का अधिकार है। ये बात सभी जानते होंगे। ये संगठन सामाजिक जागरुकता और उत्थान के लिए बनाए जाते रहें हैं।
लेकिन एक तरफ कई राष्ट्र आन्तरिक और बाह्य शान्ति की बात करते हैं। लेकिन हम विभिन्न सेनाएं रक्षादल गठित कर रहें हैं क्या हमें देश की सुरक्षा व्यवस्था पर भरोसा नहीं है या भविष्य में भरोसा नहीं रख रहे हैं।
अगर आप सेनाएं गठित कर रहें हों तो स्वभाविक आपको प्रशिक्षण और हथियारों की जरूरत होगी।
शान्त समाजिक वातावरण के लिए जरूरी है कि न के बराबर हथियार लोगों के पास पहुंचे सूरक्षा कर्मियों के सिवाय....नीचे खबर में महिलाओं की सुरक्षा और एंटी नेशनल ताकतो से निपटने के लिए बजरंग सेना कमांडो के प्रशिक्षण की बात कही हैं।
इस तथ्य को आधार मानकर चर्चा करे।
तो हम जानते हैं कि और भी सेनाएं या दल प्रशिक्षण लेते होंगे।
अब हमें कल्पना करनी होगी कि आने वाले समय में ये धार्मिक जातिगत सेनाएं ही सुरक्षा का बीड़ा उठाएगी तो देश की कानूनी सूरक्षा संस्थाओं का क्या काम होगा।
सचमुच हम सामाजिक हिंसा को न्योता दे रहें हैं।
आज हमारे पास विश्व का सबसे बड़ा कठोर संविधान हैं उत्कर्ष न्याय व्यवस्था है शक्तिशाली सूरक्षा तंत्र है तो क्या कारण हैं कि हमें समाज की सुरक्षा के लिए स्वय सेनाएं और दल गठित करने की आवश्यकता महसूस हो रही है।
आम नागरिक जो साधारण नागरिक को कहा जाता है सम्पुर्ण सरकार प्रशासन सुरक्षा आदि इन्हीं के लिए कार्य करते हैं।
इसलिए संविधान में आम नागरिकों को बिना अनुमति हथियार रखने का अधिकार नहीं हैं ।
तो फिर सभी नागरिक रजिस्टर्ड दलों और सेनाओं के सैनिक बन जायेंगे तो आप आम नागरिक किसे कहोगे?
सबसे बड़ी समस्या तो होगी कि सभी अपने दलों को मजबूत करने में समय देंगे तो राष्ट्र के सकल घरेलू उत्पादन का क्या होगा प्रशासनिक व विकासात्मक कार्यो को कौन समय देगा ? फिर प्रति व्यक्ति उत्पाद दर कहां जाएगी ये सोचने का विषय हैं।
हमारे मन्दिरों मस्जिदों , पशुओं आदि की सुरक्षा तथा महिलाओं की सुरक्षा का जिम्मा सरकार का हैं हमारी न्याय व्यवस्था और कानुन व्यवस्था का हैं।
तो फिर हम इन पर विश्वास न कर के इनकी अस्मिता को ठेस पहुंचाने का काम कर रहें हैं।
कानुन व्यवस्था को भी चाहिए कि अपने कार्यों को आम लोगों में नहीं बांटा जाये।
खुशहाल भारत में आम लोगों तथा किसानो को कृषि उपकरणों की , बच्चों को किताब व कलम की, मजदुरो को औजारों की , शिक्षित लोगों को रोजगार की जरूरत हैं।
सुरक्षा के लिए तो हमारे राष्ट्र की सेना और पुलिस बेहतर प्रशिक्षण समय समय पर ले रही हैं।
अगर धार्मिक जातिगत सेनाएं बनेगी तो हिंसा स्वाभाविक हैं।
हां एक बात और है, आत्मरक्षा के गुर जरूर सिखाये जाये महिलाओं को , बच्चों को सभी को लेकिन सामान्य।
हिंसा स्तर के नही।

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