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Tuesday, September 22, 2026

BRICS-Summit 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 भारत की मेजबानी में संपन्न ऐतिहासिक महत्व एवं वैश्विक महत्व

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18th-BRICS-18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन


18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 (18th BRICS Summit 2026) भारत की अध्यक्षता में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ है. वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों और आर्थिक बदलावों के बीच भारत की इस मेजबानी ने बहुपक्षवाद (Multilateralism) को मजबूत करने में एक ऐतिहासिक भूमिका निभाई है।

1. प्रस्तावना और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (Introduction and Historical Background)



ब्रिक्स (BRICS) दुनिया की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक शक्तिशाली समूह है, जिसका विस्तार अब 11 पूर्णकालिक सदस्यों तक हो चुका है (जिसमें भारत, ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका के साथ नए सदस्य मिस्र, इथियोपिया, ईरान, यूएई, सऊदी अरब और इंडोनेशिया शामिल हैं). 12-13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित यह शिखर सम्मेलन इस समूह के इतिहास में एक नया अध्याय है. वर्ष 2026 भारत के लिए ब्रिक्स की अध्यक्षता करने का चौथा अवसर रहा (इससे पहले भारत 2012, 2016 और 2021 में अध्यक्षता कर चुका है)।

2. सम्मेलन की मेजबानी (Hosting of the Summit)



इस ऐतिहासिक 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी भारत ने की। मुख्य शिखर सम्मेलन का आयोजन देश की राजधानी नई दिल्ली के अत्याधुनिक 

भारत मंडपम (Bharat Mandapam) कन्वेंशन सेंटर में किया गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सम्मेलन की अध्यक्षता की, जिसमें रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत वैश्विक दक्षिण (Global South) के दर्जनों राष्ट्राध्यक्षों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने हिस्सा लिया। भारत ने अपनी अध्यक्षता को "वसुधैव कुटुंबकम" (One World, One Family) और "मानवता प्रथम" (Humanity First) के दृष्टिकोण पर केंद्रित रखा।

3. शिखर सम्मेलन के मुख्य उद्देश्य (Core Objectives of the Summit)



भारत की अध्यक्षता में इस सम्मेलन का आधिकारिक विषय (Official Theme) “सुदृढ़शीलता, नवाचार, सहयोग और सतत विकास के लिए निर्माण” (Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability) निर्धारित किया गया था. इसके प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित थे:

ग्लोबल साउथ की आवाज: अंतरराष्ट्रीय मंचों पर विकासशील और कम विकसित देशों (Emerging Markets) के हितों और प्राथमिकताओं को पुरजोर तरीके से उठाना।
वैश्विक शासन में सुधार: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) और बहुपक्षीय वित्तीय संस्थानों (जैसे IMF और वर्ल्ड बैंक) में लोकतांत्रिक सुधारों की मांग को गति देना।
रणनीतिक स्वायत्तता: सदस्य देशों के बीच आर्थिक और तकनीकी क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता और रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) को बढ़ावा देना।

4. सम्मेलन के निर्धारित लक्ष्य (Targeted Goals)


भारत में आयोजित इस बैठक के दौरान सदस्य देशों ने आपसी सहयोग के कई महत्वपूर्ण लक्ष्य तय किए:

प्रौद्योगिकी का लोकतंत्रीकरण: डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे (Digital Public Infrastructure - DPI) के विकास और एआई (AI) जैसी तकनीकों के सुरक्षित उपयोग के लिए साझा नियम बनाना।
आतंकवाद पर कड़ा रुख: आतंकवाद विरोधी अभियानों (Counter-terrorism) को मजबूत करना और एफएटीएफ (FATF) मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना।
व्यापारिक सुगमता: अंतरराष्ट्रीय लेनदेन में स्थानीय मुद्राओं (Local Currencies) के उपयोग को बढ़ावा देकर पश्चिमी वित्तीय प्रणालियों पर अत्यधिक निर्भरता को कम करना।
ऊर्जा सुरक्षा: स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन (Clean Energy Transition) और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों तक समान पहुंच स्थापित करना।

5. सम्मेलन के परिणाम और 'नई दिल्ली घोषणापत्र' (Outcomes and 'New Delhi Declaration')


दो दिनों के गहन विचार-विमर्श के बाद भारत अपनी कूटनीतिक क्षमता के बल पर 'नई दिल्ली घोषणा पत्र 2026' पर सर्वसम्मति (Consensus) बनाने में पूरी तरह सफल रहा:

शांति और संयम की अपील: पश्चिम एशिया (Middle East) और यूक्रेन संकट के संदर्भ में 'नई दिल्ली घोषणापत्र' में किसी भी एकतरफा कार्रवाई की आलोचना करते हुए सभी पक्षों से शांतिपूर्ण कूटनीति का मार्ग अपनाने का आह्वान किया गया।
नए अनुसंधान मंचों की स्थापना: कृषि, खेल और रेलवे के क्षेत्र में आपसी सहयोग बढ़ाने के लिए 'ब्रिक्स कृषि अनुसंधान मंच' (BRICS Agriculture Research Platform) और 'ब्रिक्स स्पोर्ट्स काउंसिल' की स्थापना पर सहमति बनी।
प्रौद्योगिकी के वेपनाइजेशन का विरोध: प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सदस्य देशों ने महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) और उन्नत तकनीकों के सैन्यीकरण या हथियार के रूप में उपयोग (Weaponisation) के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया।
संरक्षणवाद का विरोध: बिना किसी देश का नाम लिए, वैश्विक व्यापार युद्ध और अन्यायपूर्ण एकतरफा संरक्षणवादी शुल्कों (Unilateral Protectionist Tariffs) की आलोचना की गई।


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